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Monday, June 8, 2026
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छत्तीसगढ़ पर्यटन के लिए स्वर्ग;वन विभागने खोजे 10 नए वाटरफॉल

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छत्तीसगड के बस्तर जिलेतंर्गत आनेवाले कोंडागाव के पास केशकाल झरना

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रायपुर. छत्तीसगढ़ पर्यटन के लिए स्वर्ग है। ऐसा यूं ही नहीं कहा जाता। छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक सौंदर्य बिखरा पड़ा है। कुछ अनदेखा भी है। हाल ऐसा है कि भूमि विज्ञान विशेषज्ञ ने खनिज विभाग की टीम के साथ गरियाबंद में छह तथा कोंडागांव में एक शिक्षक तथा कारोबारी की मदद से नौ वाटरफॉल की खोज की है। इसी तरह कांकेर वनमंडल में वन विभाग के अधिकारियों ने 10 से ज्यादा नए वाटरफॉल की खोज की है। इन जगहों में ट्रैकिंग की अपार संभावनाएं हैं। गौरतलब है, पर्यटन को बढ़ावा देने हर वर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के रूप में मनाया जाता है। पर्यटन के माध्यम से जहां लोग प्रकृति से जुड़ने के साथ उसका महत्व नजदीक से समझते हैं। छत्तीसगढ़ पर्यटन के मामले में अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है। साथ ही यहां पर्यटन की आपार संभावनाएं हैं। ज्यादातर लोग पर्यटन में घने जंगलों के साथ प्राकृतिक झरनों, गुफाओं के बारे में जानना चाहते हैं। इस लिहाज से छत्तीसगढ़ में घने जंगलों के साथ अनगिनत वाटरफॉल हैं। इसी के साथ कई ऐसी गुफाएं हैं, जिनके बारे में लोगों को जानकारी ही नहीं है। हाल के दिनों में खोज में कई ऐसे वाटरफॉल और गुफाएं मिली हैं, जिनके बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं है।blank

80 फीट की ऊंचाई से झरता सिंदूरीखोल जलप्रपात भू-विज्ञान विशेषज्ञ जीतेंद्र नक्का, माइनिंग इंस्पेक्टर मिदुल गुहा और उनकी टीम ने गरियाबंद तथा छुरा सीमा से सटे सिंदूरीखोल जलप्रपात एवं आमाखोल जलप्रपात की खोज की है। सिंदूरीखोल जलप्रपात टुहियामुड़ा से गंदहार मार्ग से तीन सौ मीटर दूरी पर दाहिनी ओर स्थित है। यह इलाका पूरी तरह जंगलों से घिरा हुआ है। झरनों की आवाज सुनकर सिंदूरीखोल जलप्रपात तक पहुंचा जा सकता है। जलप्रपात 80 फीट की ऊंचाई से गिर रहा है। स्थानीय ग्रामीण इस जलप्रपात को सिंदूरीखोल झरने के नाम जानते हैं। केशकाल में झरने ही झरने राज्य के बस्तर संभाग के कोंडागांव वनमंडल के केशकाल घाटी में हाल के दिनों में बहुतायत में प्राकृतिक झरनों की खोज की है। वन विभाग ने जहां दस झरनों की खोज की है। वहीं जीतेन्द्र नक्का ने स्थानीय शिक्षक टीकम सोरी, व्यवसायी राजा गोयल के साथ मिलकर नौ ऐसे जलप्रपात की खोज की है, जिनके बारे में स्थानीय लोग जानते हैं, लेकिन पर्यटकों को इसके बारे में जानकारी नहीं है। केशकाल में जीतेंद्र और उनकी टीम ने मिरदे, मुत्तेखड़का, लिंगदरहा, आमादरहा, उपरबेदी, चेरबेड़ा जलप्रपात, ग्राम चेरबेड़ा, हांखीकुडूम तथा होन्हेड जलप्रपात की खोज की है।

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छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कांगेर घाटी के बीच से होकर बहने वाली मुनगाबहार नदी पर स्थित है तीरथगढ़ फॉल। लगभग 300 फिट की ऊंचाई से गिरने वाला यह फॉल भारत के सबसे ऊंचे झरनों में से एक है। यह छत्तीसगढ़ का सबसे ऊंचा वॉटर फॉल है।

नालों से बना आमाखोल, गांधर झरना

टीम ने बेजराडीह में एक और झरने की खोज की है। बेजराडीह से बहने वाला एक स्थानीय नाला घने जंगलों से गुजरकर कई नालों के संपर्क में आकर ऊंचाई से गिरकर आकर्षक, लेकिन रोमांचित कर देने वाले झरने के रूप में झरता है। इस झरने तक पहुंचने के लिए नाले में करीब आधा किलोमीटर उतरने के साथ आधा किलोमीटर चढ़ाई करनी पड़ती है। इस झरने तक :शेष पेज 5 पर पहुंचना काफी रोमांचक है। झरने तक पहुंचने के लिए नाला पार करने के साथ कई फिसलन भरे चट्टानी रास्तों को पार करना पड़ता है। गरियाबंद जिले के ओडिशा बार्डर के आमामोरा में पर्वतमालाओं की शिखर पर भू-विज्ञान विशेषज्ञ और उनकी टीम ने कारीपगार, बनियाधंस, बूढ़ाराजा मातरकोट जलप्रपात की खोज की है।

कवर्धा में मिली कुटूमसर की तरह गुफाएं

नेशनल रिसर्च केव मिशन के डायरेक्टर डॉ. जयंत विश्वास की टीम ने छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में कई गुफाओं की खोज की है। डॉ. विश्वास की टीम ने कवर्धा स्थित देवसरा तथा मंडीखोल में कई गुफाएं ढूंढ निकाली हैं। डॉ. विश्वास के मुताबिक इनमें से एक गुफा कुटूमसर की गुफा की तरह है। इसी तरह इनकी टीम ने कांगेर वैली में कई गुफाओं की खोज की है, जिसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

पर्यटन के लिए विकसित करने की योजना राज्य में इको तथा ट्राइबल टूरिज्म की अपार संभावनाएं है। वन विभाग के साथ पर्यटन विभाग ऐसी जगहों को चिन्हित कर रहा है, जिसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। – राकेश चतुर्वेदी, पीसीसीएफ

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