
मौजूदा समाजवादी राजनीति के सबसे बड़े चेहरे और देश की प्रमुख राजनीतिक हस्ती मुलायम सिंह यादव ने एकदम जमीनी स्तर से राजनीति शुरू की थी जिसके बाद वे देश के शीर्ष राजनेताओं में शुमार हुए।राजनीति में संघर्ष और मजबूती का पर्याय बने मुलायम सिंह देश के अन्य राजनेताओं के बीच हमेशा खास रहे हैं तो इसके पीछे उनका खास तरह का व्यक्तित्व और दमित तथा वंचित तबकों को न्याय दिलाने की विकट लालसा रही है।
22 नवंबर 1939 को इटावा जिले के छोटे से गांव सैफई में जन्म लेने वाले मुलायम सिंह यादव विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री और रक्षा मंत्री के पदों तक पहुँचे। लोहिया जी के विचारों से प्रभावित होकर राजनीति में उतरने वाले मुलायम सिंह यादव ने 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना करके देश भर में छितरे समाजवादियों को एकजुट करने का प्रयास शुरू किया था और काफी हद तक इसमें सफलता भी पाई।
अपने लंबे राजनीतिक जीवन में नेताजी मुलायम सिंह यादव ने कई ऐसे काम और संघर्ष किए जिन्होंने देश की राजनीति की दिशा निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाई। महिला सशक्तिकरण और जातिगत समानता के क्षेत्र में उनका ऐसा ही अहम योगदान रहा है।
माता सावित्री बाई फुले महासभा का गठन भी ऐसे ही उद्देश्यों के साथ मैंने अपने साथियों, मार्गदर्शकों और संरक्षकों के साथ मिलकर शुरू किया था जिसे आज भी हम सफलतापूर्वक बढ़ा रहे हैं। हम जहां महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रहे हैं, वहीं इस क्षेत्र में काम करने वाले अन्य लोगों का सम्मान करना भी हमारे कार्यक्रमों का अहम हिस्सा है।
ऐसे में महिला सशक्तिकरण और पिछड़ी जातियों के उत्थान में अहम भूमिका निभाने वाले नेताजी मुलायम सिंह यादव के योगदान को भी हमारी माता सावित्री बाई फुले महासभा हमेशा सराहती रही है।
मुलायम सिंह यादव जी के इस क्षेत्र में सबसे चर्चित और बड़े कदम की बात करें तो फूलनदेवी जी को राजनीति में लाना और सांसद निर्वाचित करवाना उनका ऐसा ही फैसला रहा। राजनीतिक आलोचनाओं की परवाह न करते हुए उन्होंने फूलन देवी जी को लोकसभा का टिकट भी दिया और दो-दो बार जिताया भी।
इतना ही नहीं जब एक जातिवादी सिरफिरे ने उनकी हत्या की तो फूलनदेवी जी की अर्थी को भी उन्होंने कंधा दिया था।
फूलनदेवी जी को राजनीति में लाकर संसद तक पहुंचाना नेताजी मुलायम सिंह यादव का ऐसा कदम रहा जिसके लिए संपन्न और जातिवादी तबके ने उन्हें कभी माफ नहीं किया। उन्हें डाकुओं का समर्थक से लेकर कथित उच्च जातियों का विरोधी तक कहा लेकिन उन्होंने सारे जोखिम उठाते हुए भी फूलनदेवी को राजनीति में सम्मानित जगह दिलाई।
फूलनदेवी जी का जीवन भी संघर्ष का प्रतीक रहा। बहुत कम उम्र में शोषित होने के बाद डाकू का जीवन जीने को अभिशप्त हुईं फूलन जी के साथ जातिगत भेदभाव के साथ-साथ बेहद अमानवीय हालातों में सामूहिक बलात्कार हुआ।
फूलनदेवी जी ने भी इसका प्रतिकार किया और बेहमई कांड के जरिए उन्होंने बलात्कार करने वाले 23 लोगों को लाइन से खड़ा करके गोली मारकर साबित किया था, कि महिला जब प्रतिकार पर उतर आती है तो ऐसा कड़ा दंड देती है कि अपराधियों की आने वाली नस्लें भी कांप उठती हैं।
फूलनदेवी जी की नेतृत्व और संघर्ष की क्षमता को नेताजी मुलायम सिंह यादव ने बहुत सही तरह से पहचाना था और उन्हें उचित स्थान दिलाने में मदद की थी। नेताजी मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर उनके इस महान कार्य को याद करना महिला सशक्तिकरण के लिए समाज को प्रेरणा देता है।
(लेखिका निर्देश सिंह, जानी-मानी सोशल एक्टिविस्ट हैं और माता सावित्री बाई फुले महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं)





