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Monday, June 8, 2026
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मंदिर-गिरजा जाना कैसा, पितृ चरण जब नमन हो गया

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भिन्न भाषी साहित्य मंडल ने मनाया विश्व हिंदी दिवस

गोंदिया–भिन्न भाषी साहित्य मंडल , गोंदिया के तत्वावधान में 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में रात्रि 08 बजे गूगल मीट के माध्यम से एक सरस काव्य-गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें गोंदिया के वरिष्ठ कवि सर्वश्री रमेश शर्मा, शशि तिवारी, छगन पंचे, सुरेश बंजारा, प्रमोद सोनी के अलावा चांपा के कवि अधिवक्ता महावीर सोनी, अलीगढ़ के डॉ. अनुज चौहान, नवांकुर साहित्य परिषद दिल्ली के देवानंद शर्मा, खेरागढ़ आगरा की डॉ. नीलम सिंह चाहर, इटखोरी झारखंड के राम राय ने अपने सुमधुर गीतों और कविताओं से काव्य-गोष्ठी को यादगार बना दिया ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रमोद सोनी ने सभी को विश्व हिंदी दिवस की बधाई दी । कार्यक्रम का प्रारंभ श्री छगन पंचे की कविता से हुआ जिसमें उन्होंने आधुनिकता की दौड़ में गिरते लोक-व्यवहार पर चिंता जाहिर करते हुए कहा –
‘मोबाइल और दूरदर्शन ने दूर कर दिया है सच्ची संवेदनाओं को
आपसी मेल-जोल का चलन न मिले तो दुःख होता है ।’
श्री शशि तिवारी ने अपने गीत – “जनवरी-दिसंबर गिनते-गिनते दिन बीते” के माध्यम से बीते हुए वर्ष 2020 की पीड़ा को बड़ी सुंदरता से वर्णित किया । दूसरे दौर में प्रस्तुत उनके गीत – ‘साथी रे चलो चलें दूर कहीं,भाता नहीं कोलाहल’ ने बड़ी तेजी से कांक्रीट के जंगल में बदलते परिवेश के प्रति चिंता जाहिर की तो लगा कि ये पीड़ा तो जन-जन की पीड़ा है ।
गोंदिया के ही वरिष्ठ कवि श्री रमेश शर्मा ने हिंदी की स्थिति इन शब्दों में व्यक्त की –
‘निज आँगन में रही तिरस्कृत
विश्वान्चल में हुई पुरस्कृत’
उनके गीत ‘मन कस्तूरी हिरण हो गया’ ने साथी कवियों को मुग्ध कर दिया । विशेषकर उनकी इन पंक्तियों ने खूब दाद बटोरी –
‘मेरी काशी तेरा काबा, कठमुल्ला और पंडित बाबा
मंदिर-गिरजा जाना कैसा, पितृ चरण जब नमन हो गया ।’
चाँपा के कवि अधिवक्ता श्री महावीर सोनी ने अपनी मातृभूमि छत्तीसगढ़ की भूमि की वंदना करते हुए कहा –
‘जय छत्तीसगढ़ महतारी, मोरी जय छत्तीसगढ़ महतारी,
भारतमाता के हृदय पर, तोर महिमा है महाभारी ।’
अलीगढ़ के कवि डॉ. अनुज कुमार चौहान ने हिंदी भाषा के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कहा-
‘हिंदुस्तान का प्यार, भंडार ज्ञान का,
बंधन हो एकता का, संसार ध्यान का
उपकार देवतुल्या, मन यह समष्टि हो’ ।
आगरा की कवियत्री डॉ. नीलम चाहर ने अपने सुमधुर स्वर में कृष्ण भक्ति से ओत-प्रोत भजन सुनकर भक्तिकाल की मीरा को सजीव कर दिया ।
उनके दोहों की बानगी देखिए –
श्याम रंग और पीत पट,मुरली अधर सुहाय
हे मनमोहन आइए, थक गई बाट निहार ।।
हृदय भाव परिपूर्ण है, तनिक न संशय होय,
जित देखूँ घनश्याम हैं, पीर न जाने कोय ।।
गोंदिया के सुप्रसिद्ध कवि सुरेश बंजारा ने अपनी हास्य गजलों से कवियों से खूब ठहाके लगवाए ।
एक बानगी देखें होटल का कमरा छोड़ने से पहले
मैंने एक जरूरी काम कर डाला.
खिड़की के पर्दे से जूते पोंछे और
कागद के टुकड़ों को बेड पर डाला.
इटखोरी, झारखंड के कवि श्री राम राय ने गीत ‘ ऐ मेरी कलम लिख दे, मेरी फूलकुमारी का नाम’ का सस्वर पाठ कर काव्य गोष्ठी को श्रृंगार रस की चुलबुली मिठास में डुबो दिया । कवि प्रमोद सोनी ने अपनी कविता ‘कवि तू अपनी कलम निकाल’ द्वारा कवियों से आग्रह किया कि वे समसामयिक परिस्थितियों के अनुरूप लोगों और व्यवस्था को झंझोड़ने के लिए अपनी कलम का उपयोग करें ।
करीब 2 घंटे चली इस काव्य गोष्ठी में गोंदिया के वरिष्ठ साहित्य प्रेमी श्री राम कुन्दनानी के विगत सप्ताह हुए आकस्मिक निधन पर दुःख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
श्री शशि तिवारी के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न इस काव्य गोष्ठी का कुशल संचालन श्री रमेश शर्मा ने तथा आभार प्रदर्शन श्री प्रमोद सोनी ने किया ।

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