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Monday, June 8, 2026
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भारी मात्रा में बबूल के अवैध परिवहन पर वन विभाग की कार्रवाही, राजस्व को सौंपा जाएगा मामला

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लांजी(श्रेयष तिडके)। क्षेत्र में लगातार पेड़ो की अवैध कटाई के साथ ही परिवहन के मामले सामने आ रहे है, मुखबीर से प्राप्त सूचना के आधार पर विभाग द्वारा कार्रवाही भी की जा रही है विगत 10 दिनों के भीतर लांजी विभाग की टीम द्वारा उल्लेखनीय कार्य का प्रदर्षन किया गया, जिसके तहत सबसे पहले साजा की लकड़ी बरामद की गई तो उसके पष्चात अवैध रूप से लांजी में कपड़ो से ढंकी सागौन की लकड़ी को जप्त करने मेें विभाग को सफलता मिली और 13 फरवरी को ग्राम पौण्डी में दस पहिया ट्रक में भारी संख्या में बबूल की लकड़ी बरामद की गई।

इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार सिहारी निवासी लालचंद बिलावर के खेत में स्थित बबूल के पेड़ो की कटाई कर अवैध रूप से परिवहन का मामला सामने आया, मुखबीर से प्राप्त सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हुई और पौण्डी से बिंझलगांव मार्ग पर दस पहिया ट्रक वाहन क्रमांक एम.एच.06/के 8336 में भरी हुई लगभग 1 लाख से अधिक मूल्य की लकड़ी बरामद की गई।

– ईट भट्टे के लिए हो रहा था परिवहन
इस कार्यवाही के दौरान लकड़ी ले जा रहे कुम्हारीकला निवासी ईश्वर महेश्वरे ने बताया कि उसके द्वारा बबूल की लकड़ी के पेड़ों की कटाई के लिए ग्राम पंचायत सिहारी से प्रमाण-पत्र लिय गया था और उसने यह लकड़ी ईट भट्टे और घरेलू उपयोग के लिए खरीदी थी। विदित हो कि क्षेत्र में भारी संख्या में अवैध ईट भट्टे के कारोबारी बिना किसी अनुमति के जलाउ लकड़ी का उपयोग कर रहे है और ऐसे में उक्त कार्रवाही पर वन विभाग ने पंचनामा कार्यवाही कर मामला राजस्व विभाग को सौंपने की तैयारी कर ली है।

– राजस्व को सौपा जाएगा मामला
मुखबीर से प्राप्त सूचना के आधार पर बरामद बबूल की लकड़ी की कीमत लगभग 1 लाख रूपए आंकी जा रही है तो वहीं यह बात भी सामने आयी कि यह ट्रक खराब होने के कारण वन विभाग की पकड़ में आ गया। क्षेत्र में लगातार अवैध लकड़ी के मामले सामने आ रहे है और इस कार्रवाही के बाद लकड़ी के अवैध कारोबारी सतर्क होंगे लेकिन भविष्य में और भी कार्रवाही की संभावना के साथ विभाग के प्रति उम्मीद जताई जा रही है कि लगातार कार्यवाही की जाती रहेगी। इस कार्यवाही में रेंजर षिषुपाल अहिरवार, डिप्टी रेंजर रविंद्र सोनवाने, वन रक्षक मयूर शाण्डिल्य, विकास आसटकर, अमरनाथ नंदा, करीम राम शरण आदि का अहम योगदान रहा।

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