
गोंदिया – भिन्न भाषी साहित्य मंडल गोंदिया के तत्वावधान में रविवार 4 जुलाई 2021 को संध्या 04 :00 बजे से 06:00 बजे तक ऑनलाइन कवि गोष्ठी संपन्न हुई | कवि गोष्ठी की अध्यक्षता गोंदिया के वरिष्ठ कवि शशि तिवारी ने की । कवि गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ कवि छगन पंचे/गोंदिया ने बड़े रोचक अंदाज में किया । प्रमोद सोनी, वरिष्ठ कवि/गोंदिया के संयोजन में आयोजित इस गोष्ठी का शुभारंभ शशि तिवारी के द्वारा मांँ सरस्वती की सस्वर वंदना से हुआ। इसके बाद कवि मनोज बोरकर /गोंदिया ने अपनी कविता “दिल के रास्ते गम का काफिला चल रहा है” पढ़ी । महावीर प्रसाद सोनी/ चांपा ने अपनी कविता में लॉकडाउन को सकारात्मक सोच बताते हुए ‘ लॉकडाउन तेरे कारण से मेरे परिवार मिला है” कविता का पाठ किया। कवि चैतन्य मातुरकर/ब्रह्मपुरी ने अपनी कविता “जिंदगी को जिंदगी बनाने खातिर लड़ रहा हूं ” का शानदार पाठ किया | बिलासपुर कनौजिया श्रीवास समाज साहित्यिक मंच, छत्तीसगढ़ के महासचिव कवि राम रतन श्रीवास ने पावस ऋतु के आगमन के पूर्व और पावस ऋतु तक का सुंदर चित्रण “तपती धरती धधकती ज्वाला, से पिया मिलन पावस ऋतु” एवं ” अनमोल हर व्यक्ति इस जहां में मैं उन्हें ढूंढने निकला हूंँ” प्रस्तुत किया । सुरेश सिंह ,नागपुर ने अपनी प्रस्तुति में कहा “परिंदा उड़ना चाहता है तो पर काट देते हैं” । उनकी एक और ग़ज़ल “इश्क की गलियों में फिरती खुशनुमा सी जिंदगी” से माहौल तालियों से गूंज उठा । इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ कवयित्री प्रतिभा सिंह राणा, तुमसर ने “”बरखा रानी बरसाओ धरती की प्यास बुझाओ हम लगाए बैठे हैं आस” एवं “कारे कारे बदरा आ आ ” कविता का लय बद्ध पाठ कर सभी का मन मोह लिया | रुपचंद जुम्हारे/गोंदिया ने अपनी ग़ज़ल के माध्यम से कहा “रूह की आवाज होती है गजल जिंदगी की राज होती है ” एवं “अभी तक यार दिल में सिर्फ एहसास जिंदा है” | कवियत्री सुषमा यदुवंशी/गोंदिया ने अपनी काव्यांजलि में “बात तो एक ही है स्वर्ग कहो या केदारनाथ बात तो एक ही है” कविता की भावभीनी प्रस्तुति देकर सभी को भाव विभोर कर दिया | प्रमोद सोनी ने कविता की जापानी विधा हाइकू के माध्यम से पावस ऋतु का वर्णन किया । उनके वर्षागीत ‘ अम्बर के विस्तृत आंगन में, पवन साथ ले आया मेघ’ को उपस्थित कवियों ने बहुत सराहा ।कार्यक्रम का संचालन कर रहे एवं वरिष्ठ कवि छगन पंचे ने “क्या लिखूं क्या नहीं लिखूं विचार मंथन कर” एवं “हल्की हल्की बारिश में आपको भी भिगाऊंगा” को बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया | कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कवि एवं गीतकार शशि तिवारी ने अपने मुक्तक के माध्यम से कहा “बरसात है कागज की वो नाव नहीं है पर बच्चों में पहले जैसा चाव नहीं है” । उन्होंने”पावस की रिमझिम फुहार तन मन भिगाय रही सुध बुध बिसराय रही’ का सस्वर कविता पाठ कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया । इसके बाद कवि सुरेश बंजारा (गोंदिया) ने ” मौत तेरे पंजों से बचकर भागना है मुश्किल” कविता पाठ किया एवं अपनी हज़ल से सभी को खूब हंसाया। प्रतिभा सिंह राणा/तुमसर ने कार्यक्रम के अंत में आभार प्रकट किया ।





