

बालाघाट। सिवनी पेंच व कान्हा नेशनल पार्क से लगे बालाघाट में बाघ अधिक संख्या में होने से इसे लंबे समय से टाइगर जिला घोषित किए जाने की मांग के साथ ही टाइगर जिला भी कहा जाता है, लेकिन तमका नहीं मिल पाने के कारण दस्तावेजों में दर्ज नहीं हो पा रहा है। वहीं इस वर्ष बाघों की गणना शुरु होने की साथ ही जिले को टाइगर जिला का तमगा मिलने की संभावना भी बढ़ गई है।कारण गणना के प्रथम चरण में ही जिले की 6 रेंजों में पिछले बार की गणना की तुलना में बाघों के अधिक होने के साक्ष्य वन अमले ने डिजीटल तरीके से जुटाए है।
जिले के इन रेंजों में हो रही गणनाः बालाघाट वनवृत के अंतर्गत आने वाली रेंज बालाघाट रेंज, लालबर्रा रेंज, कटंगी रेंज, वारासिवनी रेंज, खैरलांजी रेंज, लौंगुर रेंज की 144 बीटों में गणना का कार्य किया जाना है। जिसमें से 121 बीटों में गणना का कार्य गया है और 107 बीटों में वन अमले को बाघ की मौजूदगी के साक्ष्य मिले है जो कि 88 प्रतिशत है। जबकि 14 बीटों में उनकी मौजूदी नहीं पाई गई है। वहीं 22 बीटों में गणना का कार्य होना बाकि है। जिसके चलते ही बालाघाट को टाइगर जिला का तमगा मिलने की संभावना भी बढ़ गई है।
प्रथम चरण में इस तरह की जा रही गणनाः प्रथम चरण की गणना 17 नवंबर से शुरु हुई है जो 22 नवंबर तक चलेगी। इसमें तीन दिन तक मांसाहारी वन्यप्राणी बाघ, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्गा समेत अन्य मांसाहारी वन्यप्राणियों की गणना की गई है। जिसमें पगमार्क, मल, मूत्र, पेड़ पर पंजे के निशान,बैठने या लेटने के निशान, दुर्गंध से वन्यप्राणी की पहचान कर उसे एकत्रित करने का कार्य वनविभाग का अमला कर रहा हैं। प्रथम चरण में जंगल में तय की गई ट्राजिंट लाइन के अनुसार वन अमला साक्ष्य जुटाने का कार्य कर रहा हैं।पिछली गणना में थी 60 से 70 बाघों की मौजूदगीः वर्ष 2018 में हुई बालाघाट लैंड स्केप के हिसाब से हुई गणना में 60 से 70 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी जिसके आधार पर ही बालाघाट को टाइगर जिला घोषित किए जाने की मांग की जा रही है। वहीं इस वर्ष महज 101 बीटों में ही बाघों की मौजूदगी पिछली मर्तबा हुई गणना से आगे निकल गई है। जिसके चलते ही इसे टाइगर जिला घोषित किए जाने की संभावना भी बढ़ गई है।
जिले के जंगल में 92 प्रतिशत तेंदूए की मौजूदगीः बाघ के साथ ही हिंसक वन्यप्राणी की भी गणना की जा रही है और तीन दिन की गणना में 6 रेंजों की 121 बीटों में से 111 बीटो में मतलब 92 प्रतिशत मौजूदगी के साक्ष्य वन अमले को मिले है। सिर्फ दस बीट ही ऐसी है जिसमें साक्ष्य वन अमले को नहीं मिल पाए है। इसके साथ ही भालू और गौर के भी बहुताय में वन अमले को साक्ष्य मिले हैं।
प्रथम चरण की गणना में 121 बीटों में से 107 बीटों में बाघ की मौजूदगी के साक्ष्य अमले ने एकत्रित किए है और गणना का यह कार्य जारी है। पिछली गणना से अधिक साक्ष्य इस वर्ष की गणना में एकत्रित किए गए है।बालाघाट जिले की 6 रेंजों में गणना का यह कार्य किया जा रहा है।-एनके सनोड़िया, मुख्य वनसंरक्षक, बालाघाट।





