गोंदिया-परभणी से गोंदिया लगभग 760 कि. मि. की साईकल यात्रा लोगो को शिक्षा के महत्व को लेकर संदेश देने निकले विनोद शे्न्द्रे जो एक प्राइमरी टीचर है वे कहते है कि नियमो को नही नही मानने के वजह से बीमारी से ज्यादा मौते सड़क दुर्घटना में होती है।रात को सफेद हेड लाइट को लेकर उनका कहना है कि पहले वाहनों में पीले रंग के हेड लाइट होते थे उससे लोग चकमक नही होते थे ।सरकार ने लोगो के व्दारा की जाने वाली मांग पर ध्यान देकर सफेद हेड लाइट के प्रयोग को बंद करवाना चाहिए।तभी रात को दुर्घटनाएँ रुकेगी। दुसरा मुद्दा है upper और deepar का सामने से आने वाले वाहन को देख इसका प्रयोग केवल कुछ ही लोग करते है।इस नियम के पालन पर खुद के ही ध्यान देना होगा तो कुछ राहत मिलेगी। परभणी से गोंदिया तक लगभग ७६१ किलोमीटर की यात्रा के दौरान आए अनुभव को बता रहे, विनोद शे्न्द्रे के ही शब्दों में –
परभणी, वाशिम, अकोला, अमरावती, वर्धा, नागपुर, भंडारा, गोंदिया जैसे आठ जिलों से होकर यात्रा की ,३५ स्थानों का दौरा किया और ५२३ शिक्षकों, पुस्तकालयाध्यक्षों, नागरिकों, युवक-युवतियों और ४०० बाल पाठकों से सीधा संवाद किया। यात्रा के दौरान दूसरे दिन साइकिल खराब होने के कारण कठिन था। मुझे साइकिल को मरम्मत के लिए कंधे पर उठाकर मोटरसाइकिल से वाशिम जाना पड़ा। इस काम में संदीप मुसले सर ने बहुत मदद की। अकोला पहुँचने से पहले ही अंधेरा हो गया था। अमोल दादा इंगले एक भाई की तरह मदद करने के लिए मेरे साथ आए।
जो देखा वह बताया- परभणी से रामटेक तक, ज़्यादातर कपास सोयाबीन के साथ उगाया जाता है, और रामटेक से आगे धान यानी चावल उगाया जाता है। बोली में परिवर्तन परभणी, वाशिम, (अकोला, अमरावती), (काटोल, सावनेर रामटेक) तुमसर, तिरोड़ा गोंदिया। गोदिया अधिकतर हिन्दी में बोली जाती है। मराठवाड़ा में जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय छात्र संख्या के मामले में अन्य प्रभागों की तुलना में ‘अमीर’ हैं। पशु मित्र, रात्रि मित्र दिगंबर गूंगे दादा सेनगांव,भास्करराव जाधव व्याड रिसोड, जो पुस्तकें संग्रहित करते हैं,।तेमधेरे काका रिसोड, जो 87 वर्ष की आयु में भी सक्रिय हैं।, ।धनंजय पाकेड़े नामक गुरुजी काटोल, जो विद्यार्थियों के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं,वेध प्रतिष्ठान के माध्यम से शैक्षणिक और सामाजिक कार्य करने वाले खुशाल कापसे पारशिवनी,महान हिंदी साहित्यकार और पुस्तकालयाध्यक्ष शिवकुमार शर्मा गोंदिया, जो 81 वर्ष की आयु में भी युवा हैं।
हम अशोक दादा मेश्राम जैसे विशिष्ट लोगों से मिले, जो एक वरिष्ठ साइकिल चालक हैं और जिन्होंने 66 वर्ष की आयु तक साइकिल चलाई, पूरे भारत की यात्रा की और अब विदेश जाने की तैयारी कर रहे हैं। सम्यक पब्लिक लाइब्रेरी प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से राजे वाकाटक लाइब्रेरी वाशिम, नागर लाइब्रेरी अमरावती, शारदा लाइब्रेरी गोंदिया, राजर्षि शाहू महाराज लाइब्रेरी तिवसा जिला अमरावती, पंचशील विहार सावनेर जिला नागपुर जैसे ऐतिहासिक पुस्तकालयों का भ्रमण, एक विशेष पुस्तकालय जो अधिकारी तैयार करता है, का अनुभव प्राप्त हुआ।
पुस्तकालय पुस्तकों से भरे हैं, लेकिन पाठकों के बिना सूने हैं –
यह साइकिल यात्रा सुचारू रूप से और योजनाबद्ध तरीके से संपन्न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमप्रकाश यादव परभणी, संभागीय पुस्तकालय निदेशक सुनील हुसे चौ. संभाजी नगर, जिला पुस्तकालय अधिकारी आशीष ढोक हिंगोली, बलभीम मथेले परभणी, ज्ञानेश्वर भोम्बे , बालू बुधवंत जिंतुर, अशोक कांबले दादा येलदारी, दिगंबर गूंगे दादा सेनगांव, दीपक साबले रिसोड, जिला पुस्तकालय अधिकारी बालाजी कटकड़े, संदीप मुसाले वाशिम, प्रकाश कुटे मालेगांव, अमोल दादा इंगले, संतोष ताले, अमोल सर अकोला, नबाब सर मुर्तिजापुर, दिलीप राके अमरावती, जिला पुस्तकालय अधिकारी मदावी अमरावती, राजेश टेकाड़े, धनंजय पकड़े काटोल, शरद काकड़े सावनेर, खुशाल कापसे, इटनकर , हटवार , भिवगुडे, गणवीर रामटेक, अनिल बसुले परभणी, घोडेचूर सर तुमसर, रहांगडाले सर तिरोडा, शिवकुमार शर्मा दादा, अशोक मेश्राम दादा, प्रकाश ब्रम्हणकर गोंदिया, सिद्धेश्वर शिंदे हिंगोली, नीता सोनवणे ताई नागपुर ।इस यात्रा में मिले सभी लोगों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मेरी मदद की है।गोंदिया के दीपक साबले , संदीप मुसले, संतोष ताले, दिलीप राखे , राजेंद्र टेकाडे ,कैलास भेलावे,माधुरी भेलावे, इटनकर सर, अशोक मेश्राम दादा, आपने मुझे जो प्यार, सम्मान और आदर दिया है, वह कभी चुकाया नहीं जा सकेगा। मैं सदैव आपका ऋणी रहूँगा।




