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Monday, June 8, 2026
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रिश्वत नहीं देने से रद्द किया राशन दुकान का लाइसेंस

दुकानदार नंदकिशोर साखरे ने पत्रकार परिषद में दुखड़ा सुनाया

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सालेकसा,20 अगस्त: विगत 25 वर्षों से अति संवेदनशील नक्षलग्रस्त मुरकुडोह (दरेकसा) में विपरीत परिस्थिति में बिना किसी शिकायत के राशन दुकान के माध्यम से नियमित राशन वितरित किया जा रहा है। बावजूद इसके रिश्वत न मिलने से झूठी शिकायत का आधार लेकर राशन दुकान का लाइसेंस रद्द किया गया। यह आरोप मुरकुडोह के राशन दुकानदार नंदकिशोर साखरे ने सालेकसा में आयोजित पत्रकार परिषद में लगाया।
पत्रकार परिषद में उन्होंने बताया कि आपूर्ति (पुरवठा) निरीक्षक 13 जुलाई को अपनी टीम के साथ राशन दुकान की जांच करने आए थे। इस दौरान दुकान की जांच नहीं की गई बल्कि पैसों की मांग की गई। मांग पूरी नहीं होने से लाइसेंस रद्द करने के लिए झूठी शिकायत का आधार लिया गया।
मुरकुडोह के दौरे पर गई जिलाधिश डॉ. कादंबरी बलकवड़े को लाभार्तीयों ने नियमित रूप से राशन मिलने की जानकारी दी थी। कुछ लाभार्थियों के बालको को राशन मिलता है या नहीं यह पूछने पर उन्होंने कहा था कि इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं। जिस पर जांच बिठाई गई। कुछ लाभार्थियों को राशन क्यों नहीं मिला इस पर राशन दुकानदार से स्पष्टीकरण मांगा गया। स्पष्टीकरण में उन्होंने बताया कि कुछ व्यक्तियों के राशन कार्ड पर नाम नहीं होने से उन्हें किस आधार पर राशन दिया जाएगा। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत प्रति व्यक्ति 5 किलो राशन कीट का वितरण पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में 28 व 29 जुलाई को किया गया। सब कुछ नियमानुसार होने के बावजूद केवल अधिकारियों की मांग पूरी नहीं होने से लाइसेंस रद्द किया गया। यह आरोप नंदकिशोर साखरे ने लगाते हुए बताया कि राशन दुकानदार से किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं, राशन भी नियमित रूप से मिलता है इस संदर्भ का पत्र सरपंच पोलिस पटेल एवं ग्राम वासियों ने 15 जून एवं 19 जून को प्रशासन को दिया। लेकिन पत्र पर विचार न करते हुए लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की गई। इसपर उचित जांच कर न्याय देने एवं दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग साखरे ने की है।
बता दें कि सालेकसा तहसील में रिश्वतखोरी उफान पर चल रही है। चाहे जो भी विभाग हो रिश्वत देने में जिस भी हितग्रही ने आनाकानी की उसका हाल यही होता है। राशन दुकानदारों से विशेषकर जारी यह लूट विगत कुछ दिनों से जोरों पर चल रही है। जिसका परिणाम आम जनता को भुगतना पड़ता है। राशन दुकानदार खुलेआम बताते हैं कि हम अधिकारियों को रिश्वत देते हैं तो निकालेंगे कहां से? आम जनता को दिए जाने वाले अनाज में कटौती कर रिश्वतखोर अधिकारियों की पूर्ति की जाती है यह विशेष। प्रशासन से विनंती की इस ओर विशेष ध्यान देकर सालेकसा तहसील में सुरू रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाए।

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