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Monday, June 8, 2026
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ओबीसी जातीगत जनगणना के लिये 26 नवंबर को देश के सभी जिलाे मे,संसद सत्र मे दिल्ली होगा विशाल आंदोलन

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दिल्ली मे विविध ओबीसी संघटनाओ के प्रमुखो की बैठक संपन्न. 

दिल्ली.दि.13- पिछले कुछ सालो से देशभर मे ओबीसी संघटनाओ के नेतृत्व मे चल रहे ओबीसी जणजागरण के कारण देश की धर्म एवं मंदिर केंद्रित राजनीती को संविधानिक हक अधिकार के आंदोलन मे परिवर्तीत किया है. नतिजा स्वरूप राज्य सरकारो के संविधानिक आरक्षण छिनने का 2018 मे 102 रा संविधान संशोधन बदल कर मोदी सरकार को 105 क्रमांक का संविधान करणा पडा है. मोदी सरकार को MBBS मे प्रवेशीत ओबीसी आरक्षण के कोटे की NIIT मे प्रवेश देणे को मजबूर होना पडा है. इससे यह पता चलता है की मंडल आयोग की नौकरीयो मे ओबीसी को आरक्षण देने की शिफारस के बाद देश मे धर्म और मंदिर की राजनीती कर ओबीसी के अधिकार छीनने वाली मोदी सरकार को संविधानिक आरक्षण देणे पर मजबूर होना पडा है. यह केवल ओबीसी संघटनाओ के द्वारा किये गये ओबीसी जनजागरण की वजह से संभव हुवा है.
ओबीसी की जातीगत जनगणना न करणे का प्रतिज्ञा पत्र सर्वोच्च न्यायालय को देकर 2019 के लोकसभा चुनाव मे बीजेपी ने आश्वसन तोडकर ओबीसी समाज के पीठ मे छुरा घोपणे का काम किया है. इसलिये भविष्य मे ओबीसी, एससी, एसटी के संविधानिक हक अधिकार का आंदोलन दुर्लक्षित न हो इसके लिये विविध ओबीसी संघटनाओ के प्रमुखो की बैठक दिल्ली स्थित एलआयसी कर्मचारी युनियन के कनाट प्लेस सभागृह मे संपन्न हुयी. 

यह बैठक ओबीसी जनगणना समन्वय समिती के मुख्य संयोजक बळीराज धोटे की अध्यक्षता की.बैठक का संचालन ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजयकुमार ने किया. बैठक मे सरदार सेना युपी के अध्यक्ष आर.एस.पटेल,अ.भा. ओबीसी महासभा के डॉ.वरदाणी प्रजापती, सामाजिक न्याय संघ दिल्ली के अमरसिंग,प्रा.डॉ.संदीप यादव,यदुवंशी सभा के विजेंद्रकुमार यादव,प्रा.सुधांशु कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय,प्रजापती पत्रिका के संपादक प्रजापती एल.सी.राठोड,सुप्रीम कोर्ट के सिनियर वकील अडव्होकेट लेनिन, ओबीसी मोर्चा राजस्थान के सत्या रतीवाल, ओबीसी जनगणना समिती के विजय शिंदे, ओबीसी महासभा के महासचिव महेंद्र प्रताप, दिल्ली हायकोर्ट की वकील ऍड नीता सुखाणंद,बाळकृष्ण प्रजापती,जांगडाजी आदी सम्मिलीत हुये थे.

इस बैठक मे-1 देश की जनता की जातीगत जनगणना करके देश के संशाधणोर कोन लोग हावी है इसकी पहचान कराई जाय और ओबीसी,एससी, एसटी को उनकी लोकसंख्या के अनुपात मे हर प्रवर्ग मे आरक्षण दिया जाये और इन प्रवर्गो का अनुशेष भरा जाय.2) युपीएससी उत्तीर्ण युवाओ को ही देश की सर्वोच्च सेवा मे नियुक्त किया जाय और कोलॅटरल पद्धती से की जानेवाली नियुक्तीया रद्द की जाय. 3) देश के सार्वजनिक उद्योगो का निजीकरण बंद किया जाये.4) निजी उद्योगो मे भीblank ओबीसी, एससी, एसटी को आरक्षण देनेका कानून बनाया जाये. 5) ओबीसी को लागू की गयी नॉनक्रिमि्लेअर की अट रद्द की जाय, 6) केंद्र सरकार ने बनाये तीनो काले कृषी कानून रद्द किये जाये. 7) उच्च और सर्वोच्च न्यायालयो के न्यायाधीशो की नियुक्ती न्यायिक आयोग द्वारा सामायिक परीक्षा लेकर की जाये. ई मांगो को जनता तक जाकर जणजागरण करणे के साथ केंद्र और राज्य सरकारो पे दबाव बनाने के लिये आंदोलन करणे का निर्णय लिया गया. आंदोलन का स्वरूप दिल्ली मे विशाल मोर्चा आयोजन करणा या देशभर मे हर जिल्हाधिकारी कार्यालय पे संविधान दिन 26 नवंबर या संसद के शीतकालीन सत्र के दरम्यान तारीख निश्चित कर करणे का निर्णय लिया गया. इसके लिये शीघ्र ही देश के विभिन्न ओबीसी संघटनाओ के कार्यकर्ताओ की वर्च्युअल मिटिंग लेकर तय करणे का निर्णय लिया गया.

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