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Sunday, August 23, 2026
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गुदमा-प्रताप बाग रेल लाइन: कौड़ियों के भाव जमीन अधिग्रहण से भड़का किसानों का गुस्सा

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मुआवजा राशि देख किसानों के उड़े होश, बाजार दर से 5 गुना ज्यादा मुआवजे की मांग

  • 24 अगस्त को एसडीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन; मांगे पूरी न होने पर 31 को ‘रास्ता रोको’ आंदोलन का अल्टीमेटम

गोंदिया। गुदमा-प्रताप बाग नई रेलवे लाइन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होते ही क्षेत्र में भारी जनआक्रोश पनप गया है। कटंगी कला, नागरा, हल्बी टोला और सावरी क्षेत्र के किसानों, प्लॉट, मकान एवं दुकान मालिकों को शासन की ओर से दो दिनों के भीतर प्राप्त मुआवजा पत्रों ने उनके होश उड़ा दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस भूमि का बाजार मूल्य करोड़ों में है, रेलवे विभाग और शासन उसे कौड़ियों के भाव छीनना चाहता है।

इस प्रशासनिक रवैये के विरोध में रविवार (23 अगस्त) को कटंगी कला ग्राम पंचायत सभागृह में किसानों की एक आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में कम मुआवजे को लेकर ग्रामीणों ने जमकर आक्रोश जताया। सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि अनुचित दरों पर जमीन बिल्कुल नहीं दी जाएगी और यदि रेलवे को भूमि चाहिए तो ग्रामीणों की शर्तों को मानना होगा।

किसानों की प्रमुख मांगे:

  • शासकीय नौकरी: जिनकी भी जमीन, मकान, प्लॉट या दुकान का अधिग्रहण हो रहा है, उनके परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

  • 5 गुना मुआवजा: जमीन और संपत्ति का मूल्यांकन वर्तमान बाजार दर से कम से कम 5 गुना अधिक किया जाए।

  • शेष बची भूमि का अधिग्रहण: जिनकी आधी जमीन अधिग्रहित हो रही है और बाकी हिस्सा किसी काम का नहीं बच रहा, उस पूरी भूमि का मुआवजा भी प्रदान किया जाए।

  • आवागमन का रास्ता: रेल लाइन के कारण खेतों तक जाने वाले पारंपरिक पांदन (रास्ते) बंद हो रहे हैं; किसानों के लिए वैकल्पिक रास्ते बनाकर दिए जाएं।

31 अगस्त को बालाघाट रोड पर रास्ता रोको आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार, 24 अगस्त को गोंदिया उपविभागीय अधिकारी (SDO) को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेगा। किसानों ने स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि 30 अगस्त तक शासन-प्रशासन ने उनकी मांगे स्वीकार नहीं कीं, तो 31 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे कटंगी नाके (बालाघाट रोड) पर अनिश्चितकालीन ‘रास्ता रोको’ आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान होने वाली किसी भी प्रकार की जनहानि व अव्यवस्था की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इस विरोध बैठक में प्रमुख रूप से अखिलेश सेठ, नंदू भाऊ बिसेन, कार्तिक चौहान, सूरज बावनकर, ईश्वर उपवंशी, मानिकचंद भगत, सुरेश तिवड़े, कृष्णा बान्ते, रुपेश लिल्हारे, इमलाबाई लिल्हारे, हेमंत कुमार हनवते, राजू चन्नेकर, रविंद्र कुमार चिकलोंडे सहित कटंगी कला, नागरा, हल्बी टोला और सावरी के सैकड़ों प्रभावित भू-धारक उपस्थित थे।