नातेपुते (जि. सोलापुर)। राजवैभव सांस्कृतिक भवन, नातेपुते में बुधवार, 19 अगस्त 2026 को आचार्य श्री सुविधिसागर जी महाराज के पावन सानिध्य एवं मंगल आशीर्वाद में भव्य जैनेश्वरी दीक्षा समारोह श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस मंगल अवसर पर चंद्रपुर की ब्रह्मचारिणी इंदिरा दीदी, नागपुर की ब्रह्मचारिणी सविता दीदी एवं छत्रपति संभाजीनगर की ब्रह्मचारिणी लीला दीदी ने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर संयम एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने का संकल्प लिया।
दीक्षा समारोह में सकल जैन समाज के श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर दीक्षार्थियों के वैराग्य एवं संयम के इस पावन अवसर के साक्षी बनकर पुण्यार्जन किया। समारोह से पूर्व धार्मिक परंपरानुसार मेहंदी एवं गोदभराई के मंगल कार्यक्रम भी श्रद्धा एवं उत्साहपूर्वक आयोजित किए गए। समाज की महिलाओं, परिजनों एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर दीक्षार्थियों के प्रति मंगलभावनाएं व्यक्त कीं।
मुख्य दीक्षा समारोह श्रमण संस्कृति की सुविशुद्ध अंकलीकर परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश परम पूज्य आचार्य श्री सुविधिसागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ। दीक्षा की समस्त धार्मिक विधियां विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराई गईं। संपूर्ण दीक्षा विधि के मंत्रोच्चार एवं आवश्यक धार्मिक संस्कार गणिनी आर्यिका श्री सुविधिमति माताजी के निर्देशन एवं सानिध्य में संपन्न हुए।
प्रातःकाल श्रीजी का अभिषेक तथा भव्य श्रीजी की रथयात्रा भी गुरुदेव ससंघ के सानिध्य में निकाली गई। रथयात्रा के दौरान मंत्रोच्चार, धार्मिक भजनों एवं जयघोष से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।
दीक्षा के पश्चात गणिनी आर्यिका श्री सुविधिमति माताजी द्वारा दीक्षार्थियों को नवीन संयम नाम प्रदान किए गए। ब्रह्मचारिणी इंदिरा दीदी को पूज्य क्षुल्लिका 105 सुघोषमति माताजी, ब्रह्मचारिणी सविता दीदी को पूज्य क्षुल्लिका 105 सुपूज्य माताजी तथा ब्रह्मचारिणी लीला दीदी को पूज्य क्षुल्लिका 105 सुप्रमती माताजी के नाम से संबोधित किया गया।
इस अवसर पर दीक्षार्थियों ने भौतिक आकर्षण, सांसारिक मोह-माया एवं पारिवारिक बंधनों का त्याग करते हुए आत्मशुद्धि, संयम, तप एवं मोक्षमार्ग की ओर बढ़ने का संकल्प लिया। उनका यह त्यागमय निर्णय जैन धर्म की महान श्रमण परंपरा एवं आत्मकल्याण की प्रेरणादायी मिसाल बना।
समारोह के आयोजक श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट एवं सकल जैन समाज, नातेपुते (महाराष्ट्र) द्वारा कार्यक्रम की व्यापक एवं सुव्यवस्थित तैयारियां की गई थीं। बाहर से पधारे श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं शुद्ध सात्त्विक भोजन की भी समुचित व्यवस्था की गई।
दीक्षा समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं ने नवदीक्षित माताजी के संयम जीवन की सफलता, आत्मकल्याण एवं मोक्षमार्ग की मंगलकामना करते हुए उनके प्रति श्रद्धा एवं मंगलभावनाएं व्यक्त कीं। संपूर्ण समारोह त्याग, वैराग्य, भक्ति, संयम एवं आध्यात्मिक भावनाओं से परिपूर्ण रहा।





