नई दिल्ली(न्युज एजंसी)दि.12ः- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने फैसले में अनुसूचित जाती एवं जनजाति (अत्याचार निवारण)- 2018 यानी SC/ST एक्ट में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस कानून के तहत पुलिस बिना किसी जांच के आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है। इसके तहत किसी शख्स के खिलाफ अगर कोई केस दर्ज होता है तो उसे अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) नहीं मिल सकती है।SC/ST एक्ट में संशोधन को मंजूरी देने का यह फैसला जस्टिस अरुण मिश्रा, विनीत सरण और श्रीपति रविंद्र भट की बेंच ने सुनाया है। जस्टिस मिश्रा और जस्टिस सरण संशोधन के पक्ष में थे जबकि जस्टिस भट ने इसके विरोध में।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या फैसला दिया था?
संसद ने 2018 में SC/ST एक्ट में संशोधन करते हुए सेक्शन 18A शामिल किया था। हालांकि इसके बाद सरकार ने मार्च 2018 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के साथ इसे हटा दिया। SC/ST एक्ट में किए गए बदलाव को लेकर डॉक्टर सुभाष काशीनाथ महाजन बनाम महाराष्ट्र सरकार के बीच केस चला था।
तब अपने फैसले में कोर्ट ने SC/ST एक्ट के गलत इस्तेमाल की बात करते हुए कहा था कि कोई इस केस को आधार बनाकर फर्जी केस ना कर सके, इसलिए सुरक्षा के उपाय करना जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि SC/ST एक्ट के तहत अगर कोई FIR कराना चाहता है तो पहले शुरुआती जांच करानी होगी। अगर यह शिकायत किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ है तो अप्वाइंटिंग अथॉरिटी की अनुमति के बाद ही शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। अगर कोई सरकारी नौकरी में नहीं है तो पुलिस सुप्रिटेंडेंट की मंजूरी के बाद ही केस दर्ज हो सकता है।
सु्प्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ देश भर में दलित समुदाय के लोगों ने भारी विरोध-प्रदर्शन किया था। लिहाजा केंद्र सरकार ने इस मामले में रिव्यू पीटिशन दायर किया और SC/ST एक्ट में संशोधन कर दिया।
इस बीच याचिकाकर्ताओं ने संशोधन के खिलाफ याचिका दायर कर दी। उनकी दलील थी कि यह संविधान के आर्टिकल 14 और 21 के तहत बराबरी का अधिकार और जीने के अधिकार का उल्लंघन करता है।
अक्टूबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका के रिव्यू को मंजूरी दे दी और मार्च 2018 के फैसले को बदलते हुए संशोधन को मंजूर कर लिया है।
इस बीच SC ST एक्ट को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने BJP और RSS पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार पिछड़े वर्ग के आरक्षण को खत्म करना चाहती है। जो कांग्रेस कभी नहीं होने देगी।





