खरपडि़या-सिवनहेटी मार्ग के डोरिया नाले पर बना विकास का सेतु,आदिवासी अंचल को मिली राहत
बालाघाट- जिले की तिरोड़ी तहसील के अंतर्गत खरपड़िया से सिवनहेटी मार्ग पर डोरिया नाले पर निर्मित जलमग्नीय पुल अब पूर्णता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। पुल के साथ-साथ उसके पहुँच मार्ग का कार्य भी तीव्र गति से प्रगति पर है, जिससे शीघ्र ही क्षेत्रवासियों को आवागमन की स्थायी और सुरक्षित सुविधा प्राप्त होगी। 10 करोड़ 40 लाख 64 हजार रुपये की लागत का यह पुल मात्र 08 माह में तैयार हो गया है और अब इसके रेलिंग, एप्रोच रोड एवं फिनिशिंग का कार्य अंतिम चरण में है।
यह क्षेत्र आदिवासी बहुल ग्रामों से घिरा हुआ है, जहाँ वर्षा ऋतु के दौरान डोरिया नाले में जलभराव के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता था। ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि कार्यों और दैनिक आवश्यकताओं के लिए जोखिम उठाकर नाला पार करना पड़ता था। कई बार यह स्थिति जानलेवा भी बन जाती थी, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता था।
ग्रामीणों की इसी वर्षों पुरानी समस्या के समाधान के लिए शासन एवं जनप्रतिनिधियों के अथक प्रयासों से डोरिया नाले पर 135 मीटर लंबा जलमग्नीय पुल स्वीकृत किया गया। इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा 10 करोड़ 40 लाख 64 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। पुल निर्माण कार्य दिनांक 20 फरवरी 2025 से प्रारंभ हुआ और इसके वर्ष 2026 में पूर्ण होने की संभावना है।
लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग के एसडीओ श्री अर्जुन सिंह सनोडिया ने बताया कि इस पुल के निर्माण की निर्धारित समय सीमा 27 माह थी, किंतु नवीनतम आधुनिक तकनीकों के उपयोग से पुल का निर्माण कार्य मात्र 08 माह में ही लगभग पूर्ण हो चुका है। पुल के सभी स्पान का कार्य पूरा कर लिया गया है, जो इसे समय से पूर्व तैयार होने वाली एक आदर्श परियोजना बनाता है। पुल एवं पहुँच मार्ग का कार्य पूर्ण होते ही खरपड़िया से सिवनहेटी मार्ग वर्षभर निर्बाध रूप से संचालित होगा। इससे आदिवासी ग्रामों को मुख्य मार्ग से सीधा संपर्क मिलेगा, कृषि उत्पादों के परिवहन में सुविधा होगी और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच आसान बनेगी। इस पुल के बनने से सिवनहेटी एवं उसके आसपास के ग्रामीणों को अब तिरोड़ी, कटंगी एवं खवासा की ओर जाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
इस जनहितकारी परियोजना को लेकर क्षेत्र में उत्साह और संतोष का वातावरण है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित भविष्य और विकास की नई राह है। निस्संदेह, डोरिया नाले पर बना यह जलमग्नीय पुल शासन-प्रशासन की विकासोन्मुख सोच और समावेशी विकास की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है, जो आने वाले समय में ग्रामीण अधोसंरचना विकास की मिसाल बनेगा।





