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Monday, June 29, 2026
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फुले दंपति के कारण ही महाराष्ट्र आज अग्रणी स्थान पर : विधायक  विनोद अग्रवाल

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गोंदिया,दि.4 जनवरीःतहसिल अंतर्गत आनेवाले ग्राम मरारटोला(तेढवा) में सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर दुय्यम शायरी का आयोजन किया गया था । इस अवसर पर कार्यक्रम के उद्घाटक विधायक विनोद अग्रवालने  सावित्रीबाई फुले के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा की देश की पहली महिला शिक्षक जिन्होंने अपना जीवन सिर्फ लड़कियों को पढ़ाने और समाज को ऊपर उठाने में लगा दिया । जिनका नाम सावित्रीबाई फुले है, उनके 189वीं जयंती अवसर पर विधायक विनोद अग्रवाल ने उन्हें  अभिवादन करते हुये शिक्षा महिला सशक्तिकरण के लिए उन्होंने जो किया उसके लिए उन्हें नमन किया ।  सावित्रीबाई फुले एक परिवार में पैदा हुई थीं, लेकिन तब भी उनका लक्ष्य यही रहता था कि किसी के साथ भेदभाव ना हो और हर किसी को पढ़ने का अवसर मिले । सावित्रीबाई फुले, भारत की पहली महिला शिक्षक, कवियत्री, समाजसेविका जिनका लक्ष्य लड़कियों को शिक्षित करना रह । सावित्रीबाई का जन्म 3 जनवरी, 1831 को महाराष्ट्र के एक गरीब परिवार में हुआ. मात्र नौ साल की उम्र में उनकी शादी क्रांतिकारी ज्योतिबा फुले से हो गई, उस वक्त ज्योतिबा फुले सिर्फ 13 साल के थे । पति क्रांतिकारी और समाजसेवी थे, तो सावित्रीबाई ने भी अपना जीवन इसी में लगा दिया और दूसरों की सेवा करनी शुरू कर दी. 10 मार्च 1897 को प्लेग द्वारा ग्रसित मरीज़ों की सेवा करते वक्त सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया । प्लेग से ग्रसित बच्चों की सेवा करते हुए उन्हें भी प्लेग हो गया था, जिसके कारण उनकी मृत्यु हुई। समाज के सर्वांगीण विकास के लिए फुले दांपत्य ने दिन रात प्रयत्न किया। अग्रवाल ने कहा कि फुले दांपत्य के यह विचारों को घर-घर पहुंचाने का काम हम सभी ने करना चाहिए और इसकी जिम्मेदारी लेना चाहिए। दंपति ने जीवन कैसे जीना चाहिए समाज में कैसे बदलाव होना चाहिए इसके लिए काफी प्रयत्न किया। दंपति कारण आज महाराष्ट्र अग्रणी स्थान पर है। सावित्री बाई फुले के जीवन के बारे में बताया कहा की सावित्रीबाई ने अपने जीवन के कुछ लक्ष्य तय किए, जिनमें विधवा कीशादीकरवाना,छुआछूत को मिटाना, महिला को समाज में सही स्थान दिलवाना और महिलाओं को शिक्षित बनाना. इसी कड़ी में उन्होंने बच्चों के लिए स्कूल खोलना शुरू किया. पुणे से स्कूल खोलने की शुरुआत हुई और करीब 18 स्कूल खोले गए.1848 की बात है, उस वक्त सावित्रीबाई फुले स्कूल में पढ़ाने के लिए जाती थीं. तब सावित्रीबाई फुले दो साड़ियों के साथ स्कूल जाती थीं, एक पहनकर और एक झोले में रखकर. क्योंकि रास्ते में जो लोग रहते थे उनका मानना था कि शूद्र-अति शूद्र को पढ़ने का अधिकार नहीं है. इस दौरान रास्ते में सावित्रीबाई पर गोबर फेंका जाता था, जिसकी वजह से कपड़े पूरी तरह से गंदे हो जाते और बदबू मारने लगते.स्कुल पहुंचकर सावित्रीबाई अपने झोले में लाई दूसरी साड़ी को पहनती और फिर बच्चों को पढ़ाना शुरू करतीं. ये सिलसिला चलता रहा, लेकिन बाद में उन्होंने खुद के स्कूल खोलना शुरू कर दिया जिसका मुख्य लक्ष्य बच्चियों को शिक्षित करना था । हर संभव कार्य करने का वचन दिया। इस कार्यक्रम के दीप प्रज्वलक रजनीताई गौतम(जि. प. सदस्य काटी) और अध्यक्ष गोविंद  तुरकर(सरपंच तेढवा) विशेष अतिथि के तौर पर रामराज खरे(प. स. सदस्य दासगांव) छत्रपाल तुरकर(ग्रामीण अध्यक्ष भाजपा) निलेश तुरकर (पो.पा. तेढ़वा) सनम कोलटकर, लक्ष्मिताई रहांगडालें, अनीता देवलाल मात्रे (पूर्व सरपंच) यमन गजभिए (पूर्व सरपंच) किरण गनवीर (उपसरपंच तेढवा) अनिल मते (प.स.सदस्य काटी) व सभी ग्राम पंचायत सदस्य इस अवसर पर उपस्थित थे।  संचालन और आभार प्रदर्शन इंदल जी मेश्राम (ग्रा.प. सदस्य)इन्होंने किया।