असीम आमगाँवी के मराहिल (ग़ज़ल संग्रह) को सफ़ीर-ए-ग़ज़ल अलंकार – 2024,

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आमगांव : आमगांव शहर के प्रख्यात ग़ज़ल-गो ज़नाब असीम आमगाँवी के मराहिल (ग़ज़ल संग्रह) को सफ़ीर-ए-ग़ज़ल अलंकार – 2024. मध्यप्रदेश बालाघाट की जानी मानी साहित्य संस्था *संस्कृति एवं साहित्य शोध समिति द्वारा संस्था के 2रे वार्षिक सम्मेलन में दि. 11.02.2024 को स्व.  नरेंद्रसिंह राठौर स्मृति में दिया जा रहा है।

गौर तलब है की, असीम आमगाँवी राष्ट्रीय मंचों पर ग़ज़ल पाठ कर चुकें है तथा राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय अख़बार, संझा संकलन और किताबों में प्रकाशित हो चुके है । उनकी अब तक क़रीब 7 ग़ज़लें मुल्क के जाने माने गायकों द्वारा रिकॉर्ड हो चुकी है तथा साहित्य संबंधी कई सम्मान मिले है । उल्लेखनीय यह है की असीम आमगाँवी टी. व्ही और आकाशवाणी पर भी पने ग़ज़लों का जादू दिखा चुकें है।

आप पाठकों को ज्ञात हो असीम आमगाँवी का वास्तविक नाम धर्मेंद्र भालेकरहै जो फिलहाल भवभूति शिक्षण संस्था, आमगांव द्वारा संचालित भवभूति महाविद्यालय, आमगांव में अधीक्षक के पद पर कार्यरत है । इन्हें बचपन से ही साहित्य में बेहद रूचि थी हालंकि असीम आमगाँवी मूलतः मराठी भाषी होते हुए भी उर्दू साहित्य जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाने में क़ामयाब हुए। वो अपनी ग़ज़लों में समाज, और दौर-ए-हाज़िर की नक्कासी बदलता परिवेश आदि. पर बेहद अदबी सलीके से बयां करते है । नगर वाशी इनके उज्वल भविष्य की कामना करते है और इस उपलब्धि पर आमगांव नगर समस्त साहित्य प्रेमी गर्व करते हुए शुभकामनायें दि है ।