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Monday, June 22, 2026
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बैहर में राष्ट्रीय पवार क्षत्रिय महासभा का अधिवेशन संपन्न

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मालवा प्रदेश के परमार समाज के साथ एकीकरण, राममंदिर ट्रस्ट की जगह पर आयुर्वेद महाविद्यालय एव ओबीसी की जातिनिहाय जनगणना के साथ पोवारी भाषा का उल्लेख के प्रस्ताव पर मंजूरी..

बैहर(बालाघाट)29 जनवरी। राष्ट्रीय पवार क्षत्रिय महासभा व पवार राममंदिर ट्रस्ट बैहर तथा राजाभोज स्मारक समिति संयुक्त तत्वावधान में बैहर में राष्ट्रीय पवार क्षत्रिय महासभा के 28 जनवरी को संपन्न हुए अधिवेशन में विविध प्रस्तावों पर गहन चर्चा कर उसे सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान की गई।
इनमें मध्यप्रदेश के मालवा प्रदेश के परमार समाज का पवार समाज के साथ एकीकरण, बैहर के राममंदिर ट्रस्ट परिसर की जगह पर आयुर्वेद महाविद्यालय का निर्माण, वसंत पंचमी पर सरकारी छुट्टी घोषित करने सहित हाल ही में जनगणना के लिए गए निर्णय के तहत ओबीसी प्रवर्ग की जातिनिहाय जनगणना कर पोवारी भाषा का उल्लेख करने के प्रस्तावों पर अधिवेशन में मंजूरी प्रदान की गई। इस अधिवेशन में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगड, राजस्थान, हरियाना सहित विविध राज्यो से लोगो ने उपस्थिति दर्ज कराई। अधिवेशन की शुरुआत ध्वजारोहण कर की गई।blank
अधिवेशन की अध्यक्षता राष्ट्रीय पवार क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजी. मुरलीधर टेम्भरे ने की। महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमेश देशमुख ने महासभा के पिछले अधिवेशन से लेकर आज तक समाजहित पर किये गए कार्य और उस पर लिए गए निर्णय पर ध्यानकेन्द्रित किया। इसके साथ ही देश के सभी पोवार, परमार समाज का एकतत्रिकरन किये जाने की जानकारी दी। जुलाई 2018 से आज तक संपंन्न हुई महासभा की बैठक में लिए गए प्रस्ताव का वाचन महासभा की महासचिव पुष्पा निरंजन बिसेन ने किया। इसी प्रकार प्रस्ताव समेत समाज मे विवाह पद्धति में हो रहे आडम्बर, महासभा को गाँव स्तर पर ले जाने आदि सामान्य विषयों का वाचन सभा में छत्तीसगढ़ राज्य के उपाध्यक्ष राजेन्द्र पटले ने किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजी. टेम्भरे ने राष्ट्रीय महासभा सभी को साथ लेकर काम कर रही है कि जानकारी दी। उन्हें महासभा के गावस्तर पर विस्तार की अपील की। उन्होंने बताया कि गाँव स्तर पर पोवार संघटनाओं को महासभा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। वर्ष 1964 में भोयर पवार इस शाखा के पवार(पोवार) समाज के साथ एकीकरण किया गया था। इन दोनों शाखा में आज सामजिक व्यवहार व संबंध स्थापित होकर मध्यप्रदेश के मालवा भाग के परमार समाज की विचारधारा, संस्कृति व रहनसहन सब हमारे समान होने व राजाभोज को ही मानने से इस समाज को जोड़ने का इस अधिवेशन में प्रस्ताव लिया गया है।
उन्होंने कहा, बाबा जुमदेव पंथ स्वीकारने वाले समाज के लोग भी इस समाज के साथ जुड़ रहे है। राममंदिर ट्रस्ट की जगह पर आयुर्वेद महाविद्यालय की स्थापना करना, एवं 2021की जनगणना में हमारे समाज की ओबीसी प्रवर्ग में जनगणना हो इसके लिए सभी ने एकसाथ खड़े होकर शासन से पोवार, भोयर-पवारी, अपनी मातृभाषा का उल्लेख करने का आव्हान किया।
blankमंच पर उपस्थित राष्ट्रीय महासचिव पुष्पा बिसेन, शिवनी जि.प. अध्यक्ष मिना बिसेन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमेश देशमुख, राजेंद्र पटले, अशोक बिसेन, मोतीलाल चौधरी, राष्ट्रीय पवार क्षत्रीय महासभा के पुर्व अध्यक्ष डॉ. ज्ञानेश्वर टेंभरे, अखिल भारतीय भोयर पवार महासंघ अध्यक्ष डॉ.एन.डी.राऊत, गौरीशंकर टेंभरे,संपादक शंकरलाल पवार, मालवा के बन्नोसिह परमार, जाेधपूर के जालमसिह सोडा, हरियाणा के वेदपालसिंह परमार, पुणे से मनोहर पवार, देवास से कुंजीलाल परमार, आष्टा के आनंद परमार, डॉ.गुलाब परमार, शैलेंद्रसिह परमार, भवानीसिह परमार, एन.आर.डोंगरे, पूर्व विधायक हेमंत पटले, पूर्व विधायक मधु भगत, प्रभाकर खौसी, देविका कटरे, किरणलता चोपडे, पुष्पलता बारंगे, राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रल्हाद पटले, कोषाध्यक्ष रमेश टेंभरे, सिवनी पवार समाज संगठन अध्यक्ष हरकचंद टेंभरे, कारंजा के भगवान बन्नगरे, वारासिवनी के जे.एल.बिसेन, गोमती ठाकूर, मोसम हरिणखेडे, लेखसिह राणा, रायपूर सगंठन अध्यक्ष किरणकुमार चव्हाण,गोलू नागरे सहित अनेको ने महासभा में  अपने विचार व्यक्त किये।
अधिवेशन का संचालन राष्ट्रीय पवार क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय संगठन सचिव खेमेंद्र कटरे ने किया वहीं आभार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक बिसेन ने माना।अतिथीयोंका पवांर राम मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष आर.एल.राणा,सहसचिव बी.एल.पटले,नगरसंगठन अध्यक्ष रोहीत भैरम,सचिव ढलकारम राहगंडालेसह समिती के पदाधिकारोयेंने स्वागत किया। आयोजन के लिये राष्ट्रीय पवार क्षत्रिय महासभा,राम मंदिर ट्रस्ट बैहर एंव राजाभोज स्मारक समिती के सभी पदाधिकारीयोंके साथ बैहर नगर संगठन के युवा पदाधिकारीयोंने अथक परिश्रम किया।