बालाघाट में पहली महिला सांसद बनीं भारती पारधी

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 बालाघाट। 13 मार्च 2024 को जब भाजपा आलाकमान ने पार्षद भारती पारधी को प्रत्याशी घोषित किया था, उसी समय उनकी जीत पक्की मानी जा रही थी। लगभग तीन महीनों का प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क आखिरकार काम आया और 1998 से बालाघाट-सिवनी संसदीय सीट पर कायम भाजपा का वर्चस्व इस बार भी यथावत रहा।मंगलवार को लोकसभा चुनाव के परिणामों ने कांग्रेस के सम्राट सिंह सरस्वार को 1,74,512 मतों से शिकस्त देकर भारती पारधी संसदीय क्षेत्र की पहली महिला सांसद बन गईं।

सिवनी-बालाघाट संसदीय चुनाव के 72 सालों (1952 से 2024 तक) के इतिहास में भारती पारधी ने पहली महिला सांसद के रूप में इतिहास रचा है। वहीं, 1998 से जारी कांग्रेस का सूखा इस चुनाव में भी बरकरार रहा।
परिणाम आने के एक दिन पहले कांग्रेस के दिग्गजों ने एक लाख से अधिक वोटों से जीत का दावा किया था, लेकिन इस लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस की उम्मीदों को धक्का लगा है। एक तरफ भाजपा का खेमा जश्न में डूबा है, तो कांग्रेस में मायूसी छाई है। शुरुआती रुझानों में जैसे-जैसे भाजपा बढ़त बनाती चली गई, वैसे-वैसे भाजपा नेताओं ने विजयी जुलूस व जश्न की तैयारी तेज कर दी। चौथे चरण के बाद ही पार्टी कार्यालय में जश्न का माहौल बनने लगा। शाम को शहर के मुख्या मार्गाें से विजयी जुलूस निकाला और जनता का अभिवादन किया।

पहले चरण में मिली टक्कर, फिर पीछे रह गई कांग्रेस
मतगणना के सिर्फ पहले चरण की वोटों की गिनती में कांग्रेस और भाजपा में टक्कर दिखाई दी। तब कांग्रेस जिले की छह में से तीन विधानसभाओं में और भाजपा तीन विधानसभाओं में आगे रही, लेकिन इसके बाद चरणों में कांग्रेस पीछे छूटती चली गई। लांजी, बैहर और परसवाड़ा जैसी विधानसभाओं में जहां कांग्रेस शुरुआती रुझानों में बढ़त या टक्कर देती नजर आ रही थी, बाकी के चरणों में भाजपा कांग्रेस पर भारी नजर आने लगी। सात-आठ चरण के नतीजे सामने आने के बाद कांग्रेस ने अपनी हार मान ली। मतगणना स्थल पर मौजूद कांग्रेस के प्रतिनिधि व एजेंटों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ बयां कर रही थी कि इस बार भी उन्हें हार मिल रही है।

कंकर के दावे फिर फेल, निर्दलीय चौथे पायदान पर
लोकसभा चुनाव में सबसे चर्चित प्रत्याशी के रूप में उभरे बसपा के कंकर मुंजारे का जादू इस चुनाव में भी नहीं चला। कभी कांग्रेस से चुनाव लड़ने की इच्छा जताकर टिकट को लेकर भोपाल व दिल्ली तक की सैर करके आने वाले कंकर मुंजारे इस चुनाव में तीसरे पायदान पर रहे। कंकर मुंजारे को प्रमुख दलों का जातिगत समीकरण बिगाड़ने के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार उन्होंने उम्मीद से कम वोट हासिल किए।

कंकर मुंजारे ने इस बार भी कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया
राजनीति के जानकारों का कहना है कि कंकर मुंजारे ने इस बार भी कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया है। बता दें कि इस चुनाव में कंकर मुंजारे और उनकी विधायक पत्नी अनुभा मुंजारे के बीच उपजे राजनीतिक विवाद ने प्रदेशभर में सुर्खियां बंटोरा था। कंकर ने अनुभा को पहले प्रचार तक घर से निकलने कहा, फिर स्वयं गांगुलपारा के पास जंगल में झोपड़ी में रहकर चुनाव-प्रचार किया। वहीं, इस चुनाव में निर्दलीय भुवन सिंह कोराम चौथे पायदान में रहे। उन्हें कंकर मुंजारे के बाद अधिक वोट (13074) मिले। भाजपा, कांग्रेस और बसपा के बाद सर्वाधिक वोट नंदलाल उइके को मिले। इसी तरह पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे सिवनी के हास्य कलाकार धनेंद्र देव पवार (बनवारी सेठ) कमाल नहीं कर सके।

भाजपा में खुशी, जश्न और भावनाओं का सैलाब
भाजपा की लगातार जीत के बाद भाजपा में खुशी, जीत के जश्न और भावनाओं को सैलाब उमड़ पड़ा। हर चरणाें में आगे निकलने के बाद अधिकृत घोषणा से पहले ही भाजपा कार्यालय में जश्न का माहौल बन गया। यहां पूर्व सांसद व मंत्री गौरीशंकर बिसेन, भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे, वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व नपाध्यक्ष रमेश रंगलानी, पूर्व सांसद डा. ढाल सिंह बिसेन, विधायक गौरव पारधी, पूर्व विधायक प्रदीप जायसवाल, विधायक राजकुमार कर्राहे सहित भाजपा के छोटे-बड़े हर नेता व कार्यकर्ताओं ने भारती पारधी को बारी-बारी से माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दी।

जुलूस बैंड-बाजा और गर्मजोशी के साथ निकाला भाजपा का विजयी
भाजपा का विजयी जुलूस बैंड-बाजा और गर्मजोशी के साथ निकाला गया, जो शहर के प्रमुख मार्गाें से होते हुए निकला। इस दौरान कार में खड़े होकर भारती पारधी, गौरीशंकर बिसेन, डा. बिसेन, प्रदीप जायसवाल, रामकिशोर कावरे मौजूद रहे, जिन्होंने जनता का अभिवादन किया। जुलूस के आगे-आगे कार्यकर्ता व समर्थक आतिशबाजी करते दिखे और ढोल-नगाड़ों की धुन पर थिरकते रहे। इस दौरान भाजपा पार्षद से लेकर भाजपा महिला कार्यकर्ताओं की भी भीड़ नजर आई।सुबह दस बजे के आसपास ही भाजपा के जीत की ओर अग्रसर होता देख कार्यकर्ता झूमते नजर आए। बढ़त बनाने के बाद कार्यालय में पारंपरिक बाजा की धुन पर कार्यकर्ता थिरकने लगे। विजयी जुलूस के दौरान बैंड में रामधुन सुनाई दी।

सम्राट ने हार मानी, ईवीएम में गड़बड़ी का जताया संदेह
शाम तक नतीजे स्पष्ट होने के बाद नईदुनिया से चर्चा में कांग्रेस प्रत्याशी सम्राट सिंह सरस्वार ने अपनी हार स्वीकार कर ली। उन्होंने कहा कि हमने पूरी ईमानदारी से कोशिश की थी। एकजुटता का परिचय देते हुए कांग्रेस के हर कार्यकर्ता से लेकर वरिष्ठ नेताओं ने अपना पूरा योगदान दिया, लेकिन नतीजे हमारे पक्ष में नहीं आए। हम अपनी हार स्वीकार करते हैं। कुछ दिनों में बैठक करेंगे और हार की समीक्षा करेंगे। कहां, कैसे और किन क्षेत्रों में चूक हुई, इस मंथन होगा।

जनता के विश्वास पर खरा उतरूंगी: भारती पारधी
मीडिया से चर्चा में भारती पारधी ने अपनी जीत के लिए जनता काे धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्य को पूरे मध्यप्रदेश ने प्राप्त किया है। यहां सभी 29 सीटों पर भाजपा कब्जा किया है। जनता ने भाजपा पर जो विश्वास जताया है, उस विश्वास पर मैं खरा उतरूंगी। प्रदेशभर में खुशी का माहौल है। बालाघाट-सिवनी संसदीय क्षेत्र की पहली महिला सांसद बनने का गौरव मुझे प्राप्त किया है। इसके लिए जनता जर्नादन का बहुत-बहुत आभार है।

एक नजर में बालाघाट लोकसभा चुनाव
भारती पारधी बनी संसदीय क्षेत्र की पहली महिला सांसद
बालाघाट के इतिहास में सबसे अधिक बार चिंतामन गौतम सांसद रहे (1952, 1957, 1967 व 1971)
पूर्व सांसद भोलाराम पारधी की नातिन बहू हैं भारती पारधी
चुनाव में आठ विस सीटों में कुल 13 लाख 76 हजार 207 मतदाताआें ने मतदान किया था।
इसमें छह लाख 93 हजार 226 महिला और छह लाख 82 हजार 972 पुरुष मतदाताओं ने मतदान किया था।
संसदीय क्षेत्र में कुल 18 लाख 73 हजार 653 मतदाता थे।
इस बार लोकसभा चुनाव में कुल 73.45 प्रतिशत मतदान हुआ था।
2014 में भाजपा ने कांग्रेस को 96 हजार 41 वोटों से हराया था।
2019 में भाजपा ने कांग्रेस को 2 लाख 42 हजार 66 वोटों से हराया था।

13 प्रत्याशियों को मिले इतने वोट
कंकर मुंजारे, बसपा: 53,134 (डाक मतपत्र- 251)
भारती पारधी, भाजपा: 7,12,660 (डाक मतपत्र- 2721)
सम्राट सिंह सरस्वार, कांग्रेस: 5,38,148 (डाक मतपत्र- 1815)
नंदलाल उइके, गोंगपा: 12,422 (डाक मतपत्र-84)
प्रियंका भंडारकर, निर्दलीय: 2926 (डाक मतपत्र- 20)
डीएल मानेश्वर, निर्दलीय: 10,017 (डाक मतपत्र- 23)
मोहन राऊत, निर्दलीय: 3542 (डाक मतपत्र- 05)
सत्यप्रकाश शुल्के, निर्दलीय: 1932 (डाक मतपत्र- 03)
दिलीप छाबड़ा, निर्दलीय: 1750 (डाक मतपत्र- 17)
धनेंद्र देव पवार, निर्दलीय: 7245 (डाक मतपत्र- 60)
भुवन सिंह कोराम, निर्दलीय: 13,074 (डाक मतपत्र- 46)
महादेव नागदेवे, निर्दलीय: 7192 (डाक मतपत्र- 11)
राजकुमार नागेश्वर, निर्दलीय: 6728 (डाक मतपत्र- 05)
इनमें से कोई नहीं’ यानी नोटा को 11 हजार 510 मत पड़े
506 वोट निरस्त हुए हैं।