
गोंदिया : जिले के ग्राम डोंगरगाव (पारड़ीबंध) मे प्रभु श्री राम की अयोध्या मे भव्य प्रानप्रतिष्ठा के उपलक्ष्य पर,दृष्टीहीन कलाकारों द्वारा भक्तिमय संगीत रामधून कार्यक्रम आयोजित किया गया था.कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ मोतीलाल चौधरी (अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू परिषद, कार्याध्यक्ष ), उद्घाटक आमदार विनोद अग्रवाल मुख्य अतिथि निसर्ग समूह से अनिल शिवनकर,गांव की प्रथम नागरिक सरपंच टेम्भरेताई,प्रकाश पटले,श्री तुरकर,श्रीकांत पारधी आदि गणमान्य गण मंच पर उपस्थित थे.
कार्यक्रम की शुरुआत सर्वाप्रथम महावीर हनुमान के मंदिर मे पूजा अर्चना, ,श्रीकृष्णा की मूर्ति की पूजा अर्चना कर की गई, प्रस्ताविक आयोजक निशिकांत पारधीने किया और कार्यक्रम करने के उद्देश्य को उजागर किया!तत्पश्चात मुख्य अतिथि इनका सम्बोधन हुआ.
अध्यक्षिय सम्बोधन डॉ मोतीलाल चौधरी ने कहा की 500 साल के वनवास के बाद रामलाला अयोद्या मे अपने स्वयं के महल मे इसी दिन 22 जनवरी को विराजित हुए! न जाने कितने धर्म प्रेमियों ने और हजारों कार सेवकोने बाबरी गिराने के लिए अपने प्राणो का बलिदान दिया.अशोक सिंघल, हिन्दू ह्रदय सम्राट डॉ प्रवीणभाई तोगड़िया,विनय कटियार,लालकृष्णा आडवाणी इनके द्वारा किये आंदोलन,त्याग और समर्पण के कारण आज हमें रामलला का भव्य मंदिर देखने मिल रहा है. यह दिन का स्मरण हमें और आनेवाली पीढ़ी को सदैव याद रहे इसलिए इसप्रकार के आयोजन करना आवश्यक है.
आनेवाली पीढ़ी को देश विरोधी ताकतों से बहुत बड़ा खतरा है, इसलिए हमें हिंदुत्व को जगाकर डॉ प्रवीणभाई तोगड़िया जी के मुहीम मे जुड़ जाने की आवश्यकता है.उनका संकल्प देश भरमे एक लाख हनुमान चालीसा केंद्र खोलने का है, हम सब उनका साथ देकर अपना खुदका संकल्प करें की स्वयं रोज हनुमान चालीसा का पठन करेंगे और कमसे कम एक हनुमान चालीसा केंद्र शुरू करेंगे.तभी आनेवाली पीढ़ी को हमारे संस्कार,संस्कृति और सम्बन्धों की जानकारी होंगी.हम बचपन मे सबने टीवी पर रामायन, महाभारत की धार्मिक सीरियल का प्रसारण देखा है, सम्पूर्ण गांव के लोग एक टीवी के आगे अपने काम धंदे छोड़कर बैठ जाते थे, और आज भी वह पात्र करनेवाले कलाकारों को हम अपने भगवान मानते है, ऐसी छाप उनकी हमारे दिल और दिमाख मे बनी है! हमारी युवा पीढ़ी को संस्कार देने की आवस्यकता है.यहाँ दृष्टीहीन कलाकारोंद्वारा भक्तिमय, रामधून का आयोजन किया गया बहुत ही सराहनीय कदम है, यह कलाकारों का हौसला बुलंद होगा और इनको और प्रसिद्ध होंगी और उनके जीविका का साधन होगा.इसीलिए एकबार निशिकांत जी का बहुत बहुत धन्यवाद की उन्होंने हमें बुलाकर इस आयोजन का हिस्सा बनाया.





