गोंदिया।युवा स्वाभिमान पार्टी ने राज्य में अपनी अलग ही छाप राज्य की जनता मे छोड़ी है। विधायक रवी राणा एंव सांसद नवनीत राणा इनके नेतृत्व मे गोंदिया में बहुजनो की आवाज बनकर अनेको वर्षो से जनता के लिए संघर्ष कर रहे किसानपुत्र जितेश राणे को इस क्षेत्र के किसान भाइयों की संघर्ष के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधानसभा से चुनाव लड़वाकर गोंदिया की राजनीति में भूचाल ला दिया है।उनके प्रचार के लिये मराठी अभिनेता तक यहा आकर जा चुके है। यहाँ जितेश राणे टीवी चुनाव चिन्ह लेकर मैदान में है।गोंदिया की व्यापारीक और स्वार्थ की गंदी राजनीति का घिनोना नाच देख रही जनता इन्हें बिल्कुल बाहर का रास्ता दिखाने के मूड में है। दो अग्रवाल जो धन्नासेठ होकर खुद के लिए, चुनाव लड़ रहे है वही, जितेश राणे ने किसानपुत्र होकर इनकी चुनावी बाड़ी को रौंदने का कार्य किया है। ये गोंदिया के इतिहास में पहली बार हो रहा है कि किसी निर्दलीय उम्मीदवार को इतने बड़े पैमाने में जनसमर्थन प्राप्त हो रहा है।गाव खेंडे मे जो समर्थन एक अपक्ष की तौरपर जितेश राणे को मिल रहा वह देखने लायक है।जबकी दुसरे निर्दलीय उमीदवार पैसो की बदोलत अपने पहचान जनता उमीदवार बताकर कर जनता को भ्रमीत करने मे लगे है।जिन्होने ओबीसी समाज के खासकर कुणबी एंव पवार समाज के गोंदिया विधानसभा नेताओंको धनबल के सामने पक्ष मे उन्हे निचा दिखाकर अपनी पहचान बनाने का काम करनेवाले आज असली नकली की लढाई लढ रहे है,इससे सभी ओबीसी बहुजन समाज को समज लेने की जरुरत होने की बात उन्होने परसवाडा,पिंडकेपार की सभा मे जितेश राणे ने व्यक्त की थी।खबर है कि, जितेश राणे का हर गाँव में वर्चस्व कायम हो गया है और हर बूथ पर समिति बनाई गईं है। जितेश राणे ने अपने चुनाव प्रचार को बड़े व्यापक स्तर में किया है। किसानों की समस्या को उठाकर युवाओ की आवाज बनकर उभरे किसानपुत्र जितेश राणे कहते है, वे चुनाव राजनीति करने के लिए नही अपितु इस क्षेत्र को सुजलाम सुफलाम बनाने के लिए लड़ रहे है। उन्हें जनआशीर्वाद प्राप्त हो चुका है और गोंदिया की जनता इस बार नतीजे हैरतअंगेज देंगी। विशेषता याने गोंदिया तहसिल के पवार समाज एंव ओबीसी के बडे नेताओंने एंव पदाधिकारीयोने उनकी सभा मे उपस्थितीत दर्ज कराकर उन्हे विश्वास दिलाने का काम किया है।राणे ने कभी भी राजनितीक लाभ के लिये ओबीसी बहुजन संघटन का लाभ नही लिया जबकी बहोत सारे लोक राजनितीक लाभ के लिये इन संघटनोका लाभ लेकर अपनी रोटी जातीयो के नामपर सेकखर राजनिती करने की कोशीश करते है।




