चित्रा कापसे/तिरोड़ा-स्थानिक कृषि उत्पन्न बाजार समिति परिसर में लगभग पचास वर्षों से खड़ा प्राचीन पीपल का पेड़ अब कटने के खतरे में है। विकास कार्यों के चलते इस वृक्ष सहित अन्य पेड़ों को हटाने की तैयारी की जा रही है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता बबलू रहांगडाले ने प्रशासन और वन विभाग को पत्र लिखकर पेड़ के संरक्षण की मांग की है। उनका कहना है कि यह वृक्ष न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। इसकी छांव में ग्रामीण विश्राम करते हैं, सामाजिक मेल-मुलाकात होती है और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पीपल का पेड़ ऑक्सीजन उत्पादन का बड़ा स्रोत है और अनेकों पक्षी व जीवों का आश्रय स्थल है। इसे काटना पर्यावरणीय दृष्टि से गंभीर नुकसान साबित होगा।नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने भी प्रशासन से अपील की है कि इस ऐतिहासिक व पर्यावरणीय धरोहर को बचाया जाए और भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित घोषित किया जाए।





