भूमिहिन होने से विवाह योग्य युवकांे के रिश्ते जुडने में हो रही कठीनाई
गोरेगाव-कटंगी मध्यम प्रकल्प में पिंडकेपार, पाथरी, कटंगी ग्रामों के सैकड़ों किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है। जिससे सबसे अधिक आदिवासी किसान भूमिहिन हो गए है। शासन ने भूमिहिनों को सरकारी नौकरी के लिए प्रकल्पग्रस्त के प्रमाणपत्र भी दिए है लेकिन नौकरी नहीं मिल पा रही है। जमीन भी गई है और नौकरी भी नहीं मिली। अब नई समस्या यह निर्माण हो रही है की भूमिहिन प्रकल्पग्रस्त विवाह योग्य युवकों के रिश्ते जुड़ने में कठीनाई निर्माण हो रही है। बताया गया है की जब काेई वधु पक्ष की ओर से युवकों के लिए विवाह संबंधी रिश्ते अाते है तो पुछा जाता है की खेती और जमीन कितनी है। जवाब में बताया जाता है की भूमिहिन है तो रिश्ते बनते-बनते टूट भी जाते है। इस नई समस्या से युवा पीढियांे को काफी परेशान होना पड़ रहा है। मांग है की भूमिहिन प्रकल्पग्रस्तो को जिस तरह से अनुकंपा के तहत नौकरी प्रदान की जाती है ठीक उसी तर्ज पर सभी प्रकल्पग्रस्तों को सरकारी विभागों में नौकरी दी जाए।
बता दंे की कटंगी मध्यम प्रकल्प में 1996-97 में गोरेगांव तहसील के पिंडकेपार, कटंगी, पाथरी, हिरापुर ग्रामांे के सैकड़ांे किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है। सरकार ने उस समय 40 हजार रूपए से 50 हजार रूपए तक प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया। लेकिन यह मुआवजा इतना अल्प था की एक आर जमीन भी खरीदना मुश्किल था। जिस वजह से सैकड़ों प्रकल्पग्रस्त किसान हमेशा के लिए भूमिहिन हो गए। सबसे अधिक नुकसान आदिवासी समुदाय को पहुंचा है। बताया गया है की एक ओर शासन आदिवासियांे को भूमिहिन करने से मना करता है वहीं दूसरी ओर शासन ही आदिवासियांे की शत प्रतिशत जमीन अधिग्रहित कर उन्हंे भूमिहिन कर दिया है। शासन ने प्रकल्पग्रस्तांे को नौकरी में प्राधान्य देने के लिए प्रकल्पग्रस्त के प्रमाणपत्र जारी किए है। लेकिन अधिकांश प्रमाणपत्र धारकों की मृत्यु हो गई है। वहीं सैकड़ों प्रकल्पग्रस्तों को नौकरी भी नहीं दी गई है। अब तो एक नई समस्या प्रकल्पग्रस्तों के समक्ष निर्माण हो गई है की भूमिहिन होने से विवाह योग्य युवकों के रिश्ते जुड़ नहीं रहे है। यह गंभीर समस्या आने से फिर से कटंगी मध्यम प्रकल्पग्रस्तांे का मुद्दा जीवित हो गया है।
नौकरी व उचित मुआवजा दिया जाए
कटंगी मध्यम प्रकल्प मंें जिन आदिवासी प्रकल्पग्रस्तों की जमीन अधिग्रहित की गई है ऐसे प्रकल्पग्रस्तांे को उचित मुआवजा तथा सरकारी नौकरी दी जाए। जब जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की गई तो उस समय आदिवासी किसानों को बताया गया की यदि जमीन नहीं दी तो प्रकल्प के पानी मंे जमीन को डुबाया जाएगा। जिस वजह से किसानों ने अपनी जमीन दे दी। लेकिन शासन द्वारा खेती में लगे पेड़, कुआंे का मुआवजा नहीं दिया गया और ना ही जमीन का उचित मुआवजा। शासन ने सरकारी नौकरी में प्राधान्य देने के लिए प्रकल्पग्रस्त का प्रमाणपत्र दिया लेकिन नौकरी नहीं दी गई। इतना ही नहीं तो अनेक प्रकल्पग्रस्तों की मृत्यु भी हो गई। अब तो भूमिहिन होने से विवाह योग्य युवकाें के रिश्ते जुड़ नहीं पा रहे है। जिसे देखते हुए मांग की गई है की दिए गए प्रकल्पग्रस्त प्रमाणपत्र पर नौकरी दो या इन प्रमाणपत्रों को रद्द कर दो। इस विषय को लेकर जनप्रतिनिधियांे को निवदेन भी दिया गया है।
– कुशनबाई भुरकुडे, प्रकल्पग्रस्त, कटंगी मध्यम प्रकल्प
प्रकल्पग्रस्तो को कर्ज दिया जाए
कटंगी मध्यम प्रकल्प में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है ऐसे प्रकल्पग्रस्त भूमिहिनों को नौकरी दी जाए। वहीं रोजगार के लिए शून्य ब्याज दर पर 50 लाख रूपए का कर्ज दिया जाए। इतना ही नहीं तो सरकारी योजना के तहत दुकान संकुल निर्माण किए जा रहे ऐसे संकुलांे में प्रकल्पग्रस्तों को नि:शुल्क तौर पर दुकान उपलब्ध कराई जाए।
– भरत घासले, प्रकल्पग्रस्त, पिंडकेपार





