गोंदिया (दि. 0५ जुलाई 2026)- गोंदिया के सुप्रसिद्ध कवि डॉ. गोवर्धन बिसेन ‘गोकुल’ जी द्वारा रचित छंद आधारित हिंदी काव्य-संग्रह “आराधना के स्वर” का ऑनलाइन माध्यम से भव्य एवं गरिमामय पुस्तक विमोचन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता मुन्नालाल रहांगडाले जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय क्षत्रिय पोवार (पंवार) महासंघ, भारत ने की। मुख्य अतिथि के रूप में एड. लखनसिंह कटरे जी तथा विशिष्ट अतिथियों के रूप में छगन पंचे ‘छगन’ एवं एड. देवेंद्र चौधरी ने अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त करते हुए कृति की साहित्यिक गरिमा, छंद-सौंदर्य एवं सामाजिक उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
“आराधना के स्वर” में राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति, इतिहास, अध्यात्म, भक्ति, ग्रामीण जीवन, परिवार, समाज, प्रकृति, मानवीय मूल्य तथा लोकजीवन जैसे विविध विषयों पर आधारित पाठकों के मन को छू लेने वाली प्रेरणादायक 108 उत्कृष्ट कविताओं का समावेश है। विशेष बात यह है कि संग्रह की प्रत्येक कविता अलग-अलग छंदों में सरल, सहज और हृदय स्पर्शी अभिव्यक्ति के साथ रची गई है, जो कवि की छंद-साधना, साहित्यिक दक्षता एवं सृजनात्मक प्रतिभा का उत्कृष्ट परिचय देती है। उपस्थित साहित्यकारों ने इस कृति को हिंदी साहित्य के लिए एक अमूल्य एवं संग्रहणीय योगदान बताया।
कार्यक्रम का प्रभावशाली, ओजस्वी एवं काव्यमय संचालन ऋषि बिसेन ने किया, जिसने पूरे आयोजन को साहित्यिक गरिमा एवं आत्मीयता से परिपूर्ण बना दिया। ऑनलाइन माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों से अनेक साहित्यकार, कवि, लेखक, समाजसेवी, शिक्षाविद्, साहित्यप्रेमी, समाजबंधु, मित्रगण एवं परिजन बड़ी संख्या में जुड़े और कार्यक्रम की मुक्त कंठ से सराहना की।
अंत में डॉ. हरगोविंद टेम्भरे, प्राध्यापक, भंडारा एवं राष्ट्रीय सदस्य, अखिल भारतीय क्षत्रिय पोवार (पंवार) महासंघ, भारत ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह ऑनलाइन साहित्यिक आयोजन हिंदी साहित्य, भारतीय सांस्कृतिक चेतना एवं छंद परंपरा को समर्पित एक स्मरणीय और प्रेरणादायी आयोजन के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।





