गोंदिया,14 सितबंरः-मानधन बढ़ोत्तरी की मुख्य मांग को लेकर आशा सेविका व गट प्रवर्तकों द्वारा गत ३ सितंबर से राज्यव्यापी कामबंद हड़ताल शुरू कर दी गई है। १३ से २८ सितंबर तक कुष्ठरोग, क्षयरोग व असंसर्गगिक पीडि़तों की जांच मुहिम शुरू की जानी थी। किंतु आशाओं की हड़ताल से यह मुहिम ठप हो गई है। मुहिम शुरू नहीं होने से सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को बड़ा झटका लगा है। इस हड़ताल से स्वास्थ्य विभाग के काम प्रभावित तो हो चुके ही है, किंतु सबसे अधिक नुकसान संबंधित बिमारियों से पीडि़तों को भुगतना पडेगा।
बता दे कि महाराष्ट्र सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की १५०वीं जयंती के अवसर पर कुष्ठरोग, क्षयरोग व असंसर्गगिक मरीजों की जांच मुहिम १३ से २८ सितंबर तक शुरू की गई। इसके लिए आशाओं को प्रशिक्षण दिया गया। उन्हीं के माध्यम से यह जांच मुहिम १३ सितंबर से शुरू की जानी थी, किंतु मानधन बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर पिछले ३ सितंबर से राज्य की ७० हजार से अधिक आशा व गट प्रवर्तक कामबंद हड़ताल में शामिल हो गई है। जिस वजह से १३ सितंबर से शुरू होने वाली जांच मुहिम ठप हो गई है। प्रथमही बार इस तरह की आक्रमक भूमिका आशाओं ने अपनाने से स्वास्थ्य विभाग को बड़ा झटका लगा है। लेकिन सबसे अधिक नुकसान उपरोक्त बिमारियों से पीडि़तों को उठाना पड़ेगा। क्योंकि यह जांच मुहिम शुरू नहीं हुई तो बिमारी से पीडि़तों की पहचान नहीं हो पाएगी। बता दे कि जिले की १ हजार ७० आशा सेविकाएं हड़ताल में शामिल हुई है। आशाओं को बड़ी मुश्किल से प्रतिमाह १८०० से २००० हजार रूपए तक का मेहनताना प्राप्त होता है, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक हालत कमजोर होकर उनका भविष्य अंधेरे की ओर जा रहा है। शासन ने उनकी मांग को गंभीरता से लेकर मानधन ने बढ़ोत्तरी करने का परिपत्रक निकालकर उन्हें न्याय दे। इस तरह की मांग आयटक तथा संगठनों द्वारा की जा रही है।
आशा सेविकाओं की हड़ताल होने से जिले की ४० में से सिर्फ घोनाडी व केशोरी इन दो स्वास्थ्य केंद्रों में स्वयंसेवकों के माध्यम से अभियान शुरू किया गया है। हड़ताल से स्वास्थ्य विभाग के काम प्रभावित हो रहे है। स्वयंसेवक व एनजीओ के माध्यम से काम किया जाएगा।
– डा. श्याम निमगडे, जिला स्वास्थ्य अधिकारी गोंदिया।




