बहन के संघर्ष और प्रशासनिक मदद ने प्रसन्नजीत की कराई घर वापसी,
विधायक ने ओढ़ाई शॉल तो बहन ने उतारी आरती,
कलेक्टर बोले परिवार जैसा चाहेगा वैसा करेंगे मदद
बालाघाट। आखिर, सात सालो बाद, प्रसन्नजीत, शुक्रवार की रात घर पहुंच गया। बहन के सात सालो के भाई को पाकिस्तान जेल से वापसी के लिए किए गए संघर्ष और केन्द्र, प्रदेश सरकार तथा जिला प्रशासन की मदद से प्रसन्नजीत की घर वापसी हो गई।
शुक्रवार की देरशाम, अमृतसर लेने गए जीजा राजेश खोब्रागढ़े, महकेपार पंचायत के रोजगार सहायक योगेंद्र चौधरी, मोहगांव पंचायत के रोजगार सहायक आशीष वासनिक, महकेपार चौकी पुलिस आरक्षक लक्ष्मीप्रसाद बघेल, प्रसन्नजीत को लेकर कटंगी पहुंचे। यहां सर्किट हाउस में विधायक गौरव पारधी ने प्रसन्नजीत को शॉल ओढ़ाकर और पुष्पहार पहनाकर उसका स्वागत किया। इसके साथ ही एसडीएम के.सी. ठाकुर, एसडीओपी विवेक कुमार शर्मा, सीईओ गायत्री कुमार सारथी, जनपद सदस्य मनोज बोपचे, नेगेंद्र चौहान, अरविंद देशमुख ने सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी ने पुष्पहार पहनाकर उसका स्वागत किया। विधायक पारधी ने प्रसन्नजीत के सकुशल वापसी के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रशासनिक मदद तथा परिजनों के संघर्ष की बात कही।

कटंगी से प्रसन्नजीत बहन के गांव महकेपार पहुंचा। जहां उसकी घर वापस पर आतिशबाजी कर उसका स्वागत किया गया। प्रसन्नजीत जब बहन के गांव महकेपार पहुंचा तो पूरा गांव उसे देखने के लिए उमड़ पड़ा। बहन संघमित्रा भी भाई को देखकर भावुक हो उठी। बहन संघमित्रा राजेश खोब्रागढ़े ने उसकी आरती उतारी तो भाई प्रसन्नजीत ने भी उसके पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
आपको बतात चले कि विगत दिवस 31 जनवरी को पाकिस्तान ने भारत के 7 लोगों को रिहा किया था। जिसमें पंजाब मूल के 6 लोगों के अलावा बालाघाट का प्रसन्नजीत रंगारी भी शामिल था। सभी कैदियों को अटारी बाघा बॉर्डर पर बीएसएफ के हवाले किया गया था। जहां से सभी कैदियों को उनके परिजनों को सौंपने की कार्रवाई की गई। अमृतसर पुलिस ने खैरलांजी पुलिस से संपर्क किया और प्रसन्नजीत की बहन संघमित्रा को भाई के रिहा होने की सूचना दी। संघमित्रा करीब वर्षों से अपने भाई की रिहाई के लिए संघर्ष कर रही थी। पुलिस ने संघमित्रा को बताया था कि उनका भाई रिहा होने के बाद रेड क्रॉस भवन मजीठा रोड अमृतसर में है वह वहां पहुंचकर अपने भाई को ला सकती है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण भाई को अमृतसर से लाने में दिक्कते थी। जिसके बाद कलेक्टर मृणाल मीणा ने सरकारी खर्च पर प्रसन्नजीत को वापस बहन के घर यानी महकेपार तक लाने का बीड़ा उठाया। फिलहाल प्रसन्नजीत के भारत लौटकर आने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान कैसे पहुंचा था। प्रसन्नजीत को भी याद नहीं है कि वह कैसे पाकिस्तान पहुंचा। वह केवल दिल्ली तक जाने की बात करता है, लेकिन उसके बाद उसे कुछ याद नहीं है।
दरअसल, प्रसन्नजीत रंगारी साल 2017-18 को घर से लापता हुआ था। घर वालो ने लंबे समय तक उसकी तलाश की और उसे मृत मान लिया था, लेकिन दिसंबर 2021 में एक फोन आया और पता चला कि उनका भाई प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल में बंद है। 1 अक्टूबर 2019 में प्रसन्नजीत को पाकिस्तान के बाटापुर से हिरासत में लिया गया। उस समय तक उस पर किसी तरह के आरोप तय नहीं हुए थे वह सुनिल अदे के नाम से बंद था। प्रसन्नजीत रंगारी ने जबलपुर के गुरु रामदास खालसा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी. फार्मेसी की पढ़ाई करवाई थी। पढ़ाई पूरी कर साल 2011 में एमपी स्टेट फॉर्मसी काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन किया था। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई करना चाहता था, लेकिन मानसिक स्थिति खराब होने के कारण पढ़ाई छोड़कर घर आ गया।
पाकिस्तान जेल से रिहा होकर लौटे प्रसन्नजीत जिस तरह से शांत नजर आ रहा है, उससे उसके स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता है। कलेक्टर मृणाल मीणा ने बताया कि पाकिस्तान जेल से रिहा होने के बाद उसे अमृतसर से लाने में परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने उनकी मदद की और यदि परिवार चाहता है कि प्रसन्नजीत को मेडिकल हेल्प मिले तो उसे मेडिकल हेल्प भी पहुंचाई जाएगी।





