गोंदिया: (10 मई 2026) :स्वतंत्र विदर्भ राज्य आंदोलन में अपने संघर्ष, जिद और मजबूत नेतृत्व से अलग पहचान बनाने वाली विदर्भ वीरांगना तथा विदर्भ राज्य आंदोलन समिति महिला आघाड़ी की प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती रंजनाताई मामर्डे की स्मृति में गोंदिया में भावपूर्ण शोकसभा आयोजित की गई। स्थानीय सर्किट हाउस में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा का वातावरण अत्यंत भावुक रहा।
विदर्भ राज्य आंदोलन समिति के वरिष्ठ नेता छैलबिहारी अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित सभा में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने रंजनाताई के संघर्षमय जीवन और आंदोलन में उनके अमूल्य योगदान को याद किया। विदर्भ के न्यायसंगत अधिकारों के लिए उन्होंने जीवनभर निस्वार्थ भाव से संघर्ष किया। महिलाओं को आंदोलन से जोड़ने से लेकर गांव-गांव तक विदर्भ की आवाज पहुंचाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
सभा में विदर्भवादी कार्यकर्ताओंने कहा कि, “रंजनाताई के निधन से विदर्भ आंदोलन को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने जिस समर्पण और निष्ठा से आंदोलन को मजबूत किया, उनके अधूरे सपनों को पूरा करना अब हम सबकी जिम्मेदारी है।” इस दौरान कई कार्यकर्ताओं की आंखें नम हो गईं।
शोकसभा में छैलबिहारी अग्रवाल, अतुल सतदेवे, वसंत गवली, भोजराज ठाकरे, सी.पी. बिसेन, यशवंत रामटेके, दिलीप गौतम, अरुण बन्नाटे, दीपक उईके सहित महिला आघाड़ी की राखी भारद्वाज, रुपाली उईके, कुंदा चंद्रिकापूरे, जया कुमार, वंदना तुरकर, देवकी बघेल, दीपा काशीकर, सोनू पारधी, विजया ओझा, सुधा दुबे, माया जांभुळकर आदिने उपस्थित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
ज्ञात हो कि 06 मई 2026 को हृदयाघात से रंजनाताई मामर्डे का दुखद निधन हो गया था। उनके परिवार द्वारा मरणोपरांत नेत्रदान कर समाज के प्रति एक प्रेरणादायी संदेश दिया गया। उनकी अंतिम यात्रा में संपूर्ण विदर्भ से जनसैलाब उमड़ पड़ा था। गोंदिया जिले से जिल्हा समन्वयक अतुल सतदेवे, शहर समन्वयक वसंत गवली तथा युवा आघाड़ी अध्यक्ष अरुण बनाटे ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से विदर्भ की इस वीरांगना को अंतिम विदाई दी।
विदर्भ आंदोलन की एक निर्भीक, संघर्षशील और प्रेरणादायी आवाज आज भले ही खामोश हो गई हो, लेकिन उनका संघर्ष, विचार और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा ऐसी भावना इस अवसर पर व्यक्त की गयी।





