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Saturday, June 6, 2026
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हजारों आशा सेविकाओं की जिंदगी दांव पर;सरकार के निर्णय के खिलाफ आक्रोश

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गोंदिया दि.४ -:जिला कोरोना वायरस के खिलाफ लडाई में डाक्टरों की तरह आशा सेविकाओं को भी सेवा देने के लिए सरकार ने काम पर लगाया है। इस सेवा पर शासन ने अप्रैल माह में घोषणा की थी कि अप्रैल, मई व जून में मानधन के अतिरिक्त एक-एक हजार रूपए तीन माह तक मेहनताना दिया जाएगा। लेकिन घोषणा के मुताबिक परिपत्रक एक ही माह का निकालने से आशा सेविकाओं में शासन के खिलाफ तीव्र असंतोष निर्माण हो गया है। हजारों आशा सेविकाओं की जिंदगी दांव पर आ गई है। क्योंकि वे मुंबई, पुने, नागपुर तथा अन्य राÓयों से आने वाले मजदूरों के घरों में जाकर पल-पल की जानकारी हासिल कर उनकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को दे रहे है। लेकिन मेहनताना कुछ भी नहीं दिया जा रहा है। मांग की जा रही है कि अप्रैल, मई व जून माह में अतिरिक्त एक हजार रूपए मेहनताना देकर आशाओं को 15 हजार रूपए का मानधन लागू किया जाए।
बता दें कि कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए गांवस्तर पर आशा सेविका सैनिक के रूप में दिन-रात काम कर रही है। गोंदिया जिले में 2 हजार से अधिक आशा सेविकाएं काम पर है। राÓय में 70 हजार आशा सेविकाएं कोरोना की जंग में काम कर रही है। प्रतिदिन आशाओं को ग्रामीण इलाकों में घर-घर जाकर सर्दी, खांसी, बुखार तथा होम क्वारंटाइन, संस्थात्मक क्वारंटाइन में रहने वालों की जानकारी लेना पड़ रहा है। प्रतिदिन एक आशा सेविकाओं को 25 घर का सर्वे करना पड़ रहा है। इस तरह का जोखीम भरा काम करते समय उन्हें संक्रमण होने की प्रबल संभावना बनी रहती है। शासन ने अप्रैल माह घोषणा की थी कि इस तरह का जोखीम भरा काम करने पर अप्रैल, मई व जून माह में प्रति महिना अतिरिक्त एक-एक हजार रूपया मेहनताना दिया जाएगा। लेकिन परिपत्रक अप्रैल माह का ही पहुंचने से आशा सेविकाओं को सिर्फ एक हजार रूपए ही दिया गया है। उनकी जिंदगी की कीमत शुन्य लगाई गई है। उनकी जिंदगी दांव पर होने के बावजूद भी वे कोरोना की जंग में काम कर रही है। लेकिन शासन ने उनके साथ घोषणा कर धोका दिया है, इस तरह का आरोप भी लगाया जा रहा है।

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