बालाघाट सिट से पिछले 7 चुनाव काँग्रेस को हरानेवाली अनुभा मुंजारे बनी काँग्रेसकी प्रत्याक्षी

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बालाघाट(साभार ईएमएस न्युजएंजसी) । जबलपुर संभाग की 6 सीटों वाले बालाघाट जिले के सीट क्रमांक 111 बालाघाट सीट जो जिला मुख्यालय की सीट कहलाती है। यहां के राजनीतिक इतिहास पर नजर दौडाए तो हम पाते है कि 1957 से 2018 तक सम्पन्न विधानसभा चुनाव में काँग्रेस 8 बार और 7 बार भाजपा ने जीत प्राप्त किया है। संयोग की बात यह है कि भाजपा की सातों जीत क्षेत्र के वर्तमान विधायक गौरीशंकर बिसेन द्वारा ही अर्जित की गई है।

2023 के विधानसभा चुनाव में यहां पर कुल मतदाता 232835 है। जिसमें पुरूष 115299 एवं महिला 117534 एवं 2 थर्ड जेंडर का समावेश है। कुल बूथ 276 है। यहां इस बार काँग्रेस ने समाजवादी पार्टी छोड़कर काँग्रेस में शामिल हुई दो बार की नगर पालिका बालाघाट अध्यक्ष श्रीमती अनुभा मुंजारे को उम्मीदवार बनाया है। जो जिले के पूर्व सांसद कंकर मुंजारे की पत्नी है। श्रीमती मुंजारे अब तक 7 विधानसभा 2 लोकसभा और 4 नगरपालिका चुनाव लड़ चुकी है। जबकि भाजपा ने क्षेत्र के वर्तमान विधायक गौरीशंकर बिसेन की पुत्री श्रीमती मौसम हरिनखेडे को उम्मीदवार बनाया है। विगत 20 वर्षो के इस सीट के चुनाव परिणाम पर नजर दौडाए तो हम पाते है कि काँग्रेस को इस सीट पर हार का सामना त्रिकोणीय मुकाबले के कारण हो रहा था। वोटों के विभाजन का लाभ सीधे रूप से भाजपा को मिल रहा था।

विगत 20 वर्षो के चुनाव परिणाम पर हम नजर दौडाए तो 2023 के चुनाव परिणाम किस तरफ जा सकता है इसका अंदाजा लग जायेगा। विधानसभा चुनाव 2003 में काँग्रेस के अशोक सिंह सरस्वार को 36464 एवं सपा की श्रीमती अनुभा मुंजारे को 15124 मत मिले थे, दोनों को जोड़ा जाये को कुल योग 51528 होता है। जबकि भाजपा के गौरीशंकर बिसने को 47893 मत प्राप्त हुए थे।

वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव परिणाम पर नजर दौडाए तो पाते है कि काँग्रेस के अशोक सिंह सरस्वार को 29968 एवं सपा की श्रीमती मुंजारे को 28659 मत मिले थे दोनों का कुल योग 58626 होता है, वहीं भाजपा के गौरीशंकर बिसेन को 41344 मत मिले थे। इस तरह से इस चुनाव में श्रीमती मुंजारे के मतों में बढोतरी और काँग्रेस के मतों में कमी आई थी।

वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में काँग्रेस के उमेद लिल्हारे को 5786 मत मिले और सपा की श्रीमती मुंजारे को 69493 मत मिले दोनों का कुल योग 75279 होता है। वहीं भाजपा के गौरीशंकर बिसेन को 71993 मत प्राप्त हुए। इस तरह से इस चुनाव में सपा की श्रीमती मुंजारे के मतों में भारी वृद्धि देखी गई वहीं काँग्रेस अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई।

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में काँग्रेस के विश्वेश्वर भगत को 28728 मत मिले वहीं सपा की श्रीमती मुंजारे को 45882 मत प्राप्त हुए दोनों का कुल योग 74523 है। भाजपा के गौरीशंकर बिसेन को इस चुनाव में 73476 मत मिले। इस तरह से इस सीट के विगत 20 वर्षो के चुनाव परिदृश्य पर हम नजर दौडाए तो हम पाते है कि श्रीमती मुंजारे की वजह से ही काँग्रेस को बड़ी राजनीतिक हानि अब तक उठानी पड़ी थी। अब जब वह स्वयं काँग्रेस की उम्मीदवार बन गई हैं तो सपा एवं काँग्रेस को मिलने वाले वोटों के चलते उनके प्रदर्शन में निश्चित रूप से बड़े सुधार की संभावनायें दिख रही है।

वहीं भाजपा की वर्तमान उम्मीदवार श्रीमती मौसम हरिनखेडे का राजनीतिक पृष्ठभूमि यही है कि वह क्षेत्र के वर्तमान विधायक की पुत्री है। उनकी विरासत को ही वह आगे बढ़ा रही है। पिता के राजनीतिक पृष्ठभूमि के सहारे वह जनता को कितना प्रभावित कर पायेगी यह तो चुनाव परिणाम बतायेगा। ठीक इसके विपरीत श्रीमती मुंजारे इस सीट का एक चर्चित नाम है क्योंकि वह निरंतर यहां से चुनाव में भाग लेती रही है। हालांकि इस सीट पर वर्तमान विधायक गौरीशंकर बिसेन के भतीजे विशाल बिसेन निर्दलीय एवं आम आदमी पार्टी से भाजपा के पूर्व नेता शिव जैसवाल भी चुनावी मैदान में है। यह जनता में अपना कितना प्रभाव छोड पायेगें कह पाना मुश्किल है। जो परिस्थितियां निर्मित है उसमें काँग्रेस भाजपा में सीधा मुकाबला होते हुए दिख रहा है और विगत चार चुनाव के परिणाम पर नजर दौडाए तो हम पाते है कि काँग्रेस का पल्ला पूर्व चुनाव के मुकाबले में इस बार भारी है।