
बालाघाट। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में सांसद भारती पारधी ने ऑनलाइन गेमिंग की बढ़ती लत और उससे जुड़ी आत्महत्या की घटनाओं का गंभीर मुद्दा सदन में उठाया। बच्चों और युवाओं के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय को उठाते हुए सांसद भारती पारधी ने कहा कि आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन गेमिंग की लत तेजी से बच्चों और युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रही है, जिसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। कई मामलों में यह लत अवसाद, सामाजिक अलगाव और अंततः आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं का कारण बन रही है।
उन्होंने हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों द्वारा की गई आत्महत्या की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि वे लंबे समय से ऑनलाइन गेमिंग टास्क और मोबाइल की लत से जूझ रही थीं। सांसद पारधी ने इस घटना को डिजिटल एडिक्शन का बेहद चिंताजनक उदाहरण बताते हुए केंद्र सरकार से इस विषय पर तत्काल और ठोस कदम उठाने की बात कही।
सांसद पारधी ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में हर वर्ष लगभग 1.6 लाख से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या किशोरों और युवाओं की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो यह आने वाली पीढ़ी के लिए गंभीर संकट बन सकता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि देशभर के स्कूलों में डिजिटल लत के प्रति जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा और सुरक्षित इंटरनेट उपयोगको अनिवार्य विषय के रूप में लागू किया जाए। साथ ही एडिक्टिव ऑनलाइन गेम्स पर सख्त नियंत्रण के लिए प्रभावी कानून बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। गौरतलब हो कि संसद में नियम 377 के अंतर्गत प्रतिदिन सीमित संख्या में ही सांसदों को अपने मुद्दे रखने का अवसर मिलता है।





