भंडारा –मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने भंडारा जिले के मोहाडी पुलिस थाना में वर्ष 2025 में दर्ज पॉक्सो प्रकरण में आरोपी प्रणय मनोहर पाटिल को नियमित जमानत प्रदान की है। न्यायमूर्ति एम. एम. नेरलीकर की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
अभियोजन के अनुसार प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 64, 64(2)(i), 70(2) एवं 3(5) के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम, 2012 की धाराओं 4, 6, 8 एवं 17 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। मामले में पीड़िता द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के आधार पर अपराध पंजीबद्ध किया गया था।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य न्यायालय के समक्ष रखा गया कि प्रकरण के मुख्य आरोपी सहित अन्य सह-आरोपियों को पूर्व में सक्षम न्यायालय द्वारा जमानत प्रदान की जा चुकी है। साथ ही डीएनए रिपोर्ट में आवेदक का जैविक संबंध भ्रूण से स्थापित नहीं हुआ है। राज्य पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए आवेदक की भूमिका पर आपत्ति दर्ज कराई, जबकि बचाव पक्ष ने इन परिस्थितियों को मामले में महत्वपूर्ण परिवर्तन बताया।
रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री, डीएनए रिपोर्ट तथा मामले की परिवर्तित परिस्थितियों पर विचार करने के उपरांत उच्च न्यायालय ने यह माना कि आवेदक को कड़ी शर्तों के साथ नियमित जमानत प्रदान की जा सकती है। न्यायालय ने ₹50,000 के निजी मुचलके एवं दो सक्षम जमानतदारों पर जमानत मंजूर करते हुए साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने, गवाहों को प्रभावित न करने तथा नियमित रूप से विचारण न्यायालय में उपस्थित रहने जैसी शर्तें भी लगाई हैं।
आवेदक की ओर से अधिवक्ता वेदांत पांडे ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष यह तर्क रखा कि मामले के मुख्य आरोपी एवं अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है तथा डीएनए रिपोर्ट भी अभियोजन के कथित घटनाक्रम का समर्थन नहीं करती। इन परिवर्तित परिस्थितियों के आधार पर नियमित जमानत की मांग की गई, जिसे स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने आवेदक को सशर्त नियमित जमानत प्रदान की।





