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Saturday, August 1, 2026
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सेवानिवृत्ति के 6 वर्ष बाद भी पेंशन का इंतजार, आर्थिक संकट और बीमारी से जूझ रहे राजकुमार जैन

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35 वर्षों तक बच्चों को शिक्षा देने वाले शिक्षक की पीड़ा: 
गोंदिया-एक शिक्षक, जिसने अपने जीवन के 35 वर्ष समाज और राष्ट्र के भविष्य को संवारने में समर्पित कर दिए, आज अपनी ही जिंदगी की सबसे कठिन परीक्षा से गुजर रहा है। गोंदिया शहर के स्थानीय माताटोली म्युनिसिपल हाईस्कूल से सेवानिवृत्त शिक्षक राजकुमार जैन पिछले 6 वर्षों से पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले इस शिक्षक को अपने ही अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
65 वर्ष की आयु पार कर चुके राजकुमार जैन मधुमेह सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। आर्थिक तंगी के कारण उनका उपचार भी प्रभावित हो रहा है। जिस व्यक्ति ने हजारों विद्यार्थियों को जीवन का मार्ग दिखाया, आज वही अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए छोटे-मोटे कार्य कर किसी तरह जीवनयापन करने को विवश है।
6 वर्ष से अधूरी है न्याय की उम्मीद
सेवानिवृत्ति के बाद से राजकुमार जैन ने नगर परिषद, शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार आवेदन प्रस्तुत किए। पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक को पत्र लिखकर अपनी व्यथा बताई, लेकिन आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका।
उनका कहना है कि सरकारी कार्यालयों में आवेदन देने के बावजूद केवल आश्वासन मिलते रहे, जबकि वास्तविक कार्रवाई अब तक नहीं हुई। समय बीतता गया और संघर्ष का छठा वर्ष भी शुरू हो गया।
बीमारी, जिम्मेदारियां और बढ़ती आर्थिक परेशानी
राजकुमार जैन बताते हैं कि पेंशन नहीं मिलने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इलाज, दवाइयों और घरेलू खर्चों का बोझ उठाना कठिन हो गया है। जमा पूंजी समाप्त हो चुकी है और ग्रेच्युटी की राशि भी अब तक प्राप्त नहीं हुई। ऐसे में परिवार का जीवन अत्यंत कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है।
वे बताते हैं कि अपने परिवार के साथ-साथ जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का भी प्रयास करते रहे हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण यह कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
जनप्रतिनिधियों से भी नहीं मिली अपेक्षित मदद
राजकुमार जैन का आरोप है कि कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अपनी स्थिति से अवगत कराने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उनका कहना है कि यदि एक शिक्षक को अपने वैधानिक अधिकारों के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ रहा है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग की चेतावनी
हताश राजकुमार जैन ने कहा कि यदि शीघ्र ही उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य लंबित सेवानिवृत्ति लाभ जारी नहीं किए गए, तो वे राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग करेंगे। उनका कहना है कि जीवनभर ईमानदारी से सेवा करने के बाद भी यदि सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार नहीं मिलता, तो यह उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक स्थिति है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनके मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर लंबित पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य सभी वैधानिक लाभ शीघ्र जारी किए जाएं, ताकि वे अपने शेष जीवन को सम्मानपूर्वक जी सकें।
बड़ा सवाल
राज्य में सेवानिवृत्त कर्मचारियों और शिक्षकों के हितों की बात अक्सर की जाती है, लेकिन यदि एक शिक्षक को सेवानिवृत्ति के 6 वर्ष बाद भी अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटकना पड़े, तो यह व्यवस्था की गंभीर संवेदनहीनता को दर्शाता है। जिन्होंने पूरी निष्ठा से पीढ़ियों का भविष्य संवारा, क्या उन्हें बुढ़ापे में सम्मान और सुरक्षा का अधिकार भी समय पर नहीं मिलना चाहिए? यह प्रश्न केवल राजकुमार जैन का नहीं, बल्कि उन सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों का है जो वर्षों से अपने वैधानिक अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।