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Wednesday, July 1, 2026
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आदिवासी विभाग मे ‘कन्यादान’ एंव ‘गाय’ वितरण योजना में फर्जीवाड़ा

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गोंदिया,3जनवरी: आदिवासियों के कल्याण के लिए सरकारी योजनाओं में पद का दुरूपयोग कर भ्रष्टाचार करनेवाले दो तत्कालीन प्रकल्प अधिकारियों के खिलाफ देवरी थाने में २ जनवरी को धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। घटना गोंदिया के देवरी स्थित एकात्मिक आदिवासी प्रकल्प कार्यालय देवरी में वर्ष २००४ से २००६ के दौरान घटित हुई। तब २००४-०५ में प्रकल्प अधिकारी पद पर रहते हुए ६५ वर्षीय आरोपी तथा वर्ष २००५-०६ में प्रकल्प अधिकारी पद पर तैनात ६२ वर्षीय आरोपी ने आदिवासी विकास के मार्फत शुरू की गई कन्यादान योजना अंतर्गत मंगलसूत्र वितरण, जीवन उपयोगी बर्तन वितरण तथा गरीब आदिवासीयों को गाय वितरण योजना में खुद के फायदे के लिए गैरकानूनी तरीके से १५ लाख ७ हजार ६०८ रुपये की शासकीय निधि का गबन करते हुए सरकार के साथ धोखाधड़ी की।

वैसेही गोर गरीब आदिवासी लड़कियों के विवाह हेतु आर्थिक मदद की दृष्टि से डेढ़ दशक पूर्व राज्य सरकार ने आदिवासी कन्यादान योजना शुरू की। इस योजना के अंतर्गत सामूहिक विवाह में शामिल होनेवाले प्रत्येक वधु (कन्या) को १० ग्राम का मंगलसूत्र एवं जीवन उपयोगी बर्तन , एकात्मिक आदिवासी विकास प्रकल्प देवरी अंतर्गत वितरित किए जाने थे, तद्हेतु इन दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि, इन्होंने कन्यादान योजना के लाभार्थियों की सूची महज कागजों पर बनायी और कन्यादान योजना के तहत ९ लाख ६० हजार रूपये की मंगलसूत्र राशि खुद के निजी स्वार्थपूर्ति हेतु डकार ली। जीवन उपयोगी बर्तन योजना में ३ लाख ९ हजार रुपये का फर्जीवाड़ा किया, साथ ही आदिवासी किसानों को सबल और सक्षम बनाने हेतु उन्हें दुधारू पशु देने की योजना इस विभाग के तहत थी, जिसमें ३२ गाय के वितरण में फर्जीवाड़ा हुआ और २ लाख ३८ हजार ६०८ रूपये गाय के नाम पर हजम करने का मामला सामने आय गया ।

इस तरह इन दोनों अधिकारियों ने योजना के तहत किसी भी प्रकार के कोई पुख्ता कागजपत्र शासन को सादर नहीं किए और ना ही सामूहिक विवाह के आयोजन के संदर्भ में प्रत्यक्ष प्रमाण ही प्रस्तुत किए। प्रकल्प अधिकारी के जवाबदार पद पर रहते हुए उक्त दोनों ने खुद के फायदे हेतु राशि का गबन किया और शासन को धोखाधड़ी का शिकार बनाया। गौरतलब है कि, आदिवासी कन्यादान योजना इस मामले के बाद कई जिलों में कागजों पर चलाई जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

इन अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद उनकी जगह पदस्थ हुए अधिकारियों ने जब फाईलें खंगाली तो उन्हें गड़बड़ी समझ में आयी, जिसका अहवाल उन्होने शासन को भेजा, इसी तरह के गड़बड़ी की शिकायतें महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों से सरकार तक पहुंची, जिसके बाद शासन ने आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जांच हेतु गायकवाड़ कमेटी का गठन किया।अब गायकवाड़ समिति द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के बाद इस घटित फर्जीवाड़े के प्रकरण के संदर्भ में दोनों तत्कालीन भ्रष्ट प्रकल्प अधिकारियों के खिलाफ देवरी थाने में अपक्र. ०१/२०२० के भादंवि ४०९, ४२० का जुर्म दर्ज किया गया है।पुलिस सूत्रों ने जानकारी देते बताया कि, एफआयआर दाखिल हो चुका है, आरोपी अटक होना बाकि है। गायकवाड़ कमेटी के इन्वेस्टीगेशन (चौकसी) के माध्यम से सहा. प्रकल्प अधिकारी (भंडारा) फिर्यादी महानंदा अंबादे की शिकायत पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ ४०९, ४२० का मामला दर्ज किया गया है। दोनों आरोपी वर्ष २००४-०५ था २००५-०६ में देवरी प्रकल्प अधिकारी पद पर तैनात थे। इस विभाग में गड़बड़ झाला आगे भी है, लेकिन अभी गायकवाड़ समिति ने २ वर्ष की अहवाल रिपोर्ट भेजी है, जिनमें १५ लाख ७ हजार ६०८ रूपये का फर्जीवाड़ा सामने आया है। मामले की गहन जांच पड़ताल देवरी थाने के पुलिस उप निरीक्षक अशोक अवचार द्वारा की जा रही है।